जोधपुर

Pakistan Minorities: पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को इस पद पर मिलती है नौकरी

Pakistan Minorities: आधे से ज्यादा सरकारी आरक्षित पद खाली - मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में हुआ खुलासा-अल्पसंख्यकों के लिए सिर्फ सफाई कर्मी की नौकरी
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Jun 03, 2022
Pakistan Minorities: पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को इस पद पर मिलती है नौकरी
Pakistan Minorities: पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को इस पद पर मिलती है नौकरी

Pakistan Minorities: सुरेश व्यास/जोधपुर। पाकिस्तान में 80 फीसदी से ज्यादा अल्पसंख्यकों को पूरी पगार भी नहीं मिलती। यहां तक कि विभिन्न सरकारी विभागों में इनके लिए आरक्षित आधे से ज्यादा पद भी खाली हैं। सरकारी नौकरी मिलती है भी तो अधिकांश को सफाई कर्मचारी के पद पर।

पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग की यूरोपियन यूनियन के सहयोग से करवाए गए अध्ययन की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। हाल ही जारी 'असमान नागरिकः अल्पसंख्यकों के प्रति व्यवस्थागत भेदभाव का अंत' विषयक रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों खासकर सफाई कर्मियों के साथ भेदभाव और विषम स्थितियों की तस्वीर पेश की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान सरकार ने साल 2009 में अल्पसंख्यकों के लिए 22 वेतन शृंखलाओं की सरकारी नौकरियों में पांच प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया था। इन आरक्षित पदों के 50 फीसदी से ज्यादा पद अब भी खाली हैं। जो पद भरे गए हैं उनमें भी 80 फीसदी को सफाई कर्मी जैसी अल्पवेतन शृंखला की नौकरियां दी गई है। आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान के कुल सरकारी कर्मचारियों में से 97.2 प्रतिशत मुस्लिम और मात्र 2.8 फीसदी अल्पसंख्यक है।

सिर्फ गैर मुस्लिम ही योग्य
आयोग की अध्यक्ष राबिया जवेरी आघा ने रिपोर्ट के प्राक्थन में इस बात पर हैरानी जाहिर की कि अल्पसंख्यकों के साथ न सिर्फ भेदभाव किया जाता है, बल्कि इनके लिए जॉब वैकेंसी के विज्ञापनों में भी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल होता है। सफाई कर्मी की भर्ती के लिए निकलने वाले विज्ञापनों में 'सिर्फ गैर मुस्लिमों के लिए' जैसे शब्दों का इस्तेमाल होता है। आयोग ने ऐसे 300 से ज्यादा विज्ञापन चिह्नित किए हैं। वे कहती हैं कि 'रोजगार में अल्पसंख्यक समुदाय के साथ सरकारी एजेंसियों का भेदभाव न सिर्फ असंवैधानिक बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानको के विरुद्ध है।'

कोटा भरने में कारस्तानी
पाकिस्तान की केंद्र सरकार के साथ सिंध व पंजाब समेत सभी प्रांतीय सरकारें आरक्षण का कोटा भरने में भी कारस्तानी कर देती हैं। अधिकांश स्थानों पर आरक्षित पद सिर्फ सफाई कर्मचारियों से ही भरने की कोशिश की जाती है।

वेतन भत्तों में खेल
सिंध प्रांत में न्यूनतम मजदूरी 25 हजार रुपए प्रतिमाह निर्धारित है, लेकिन अल्पसंख्यक कार्मिकों को यह भी पूरी नहीं मिलती। अध्ययन के दौरान सामने आया कि ऐसे कार्मिकों को अस्थाई नौकरी के लिए भी बांड पर 20 हजार रुपए देने का उल्लेख है, लेकिन असल में तनख्वाह 10 से 15 हजार थमा दी जाती है।

एक्सपर्ट कमेंट
पाकिस्तान के वजूद के साथ ही वहां पर अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव व शरारत भरा व्यवहार किया जाता रहा है। नॉकरियो से लेकर जीवन के हर क्षेत्र में यह साफ झलकता है। दुनिया के तमाम मानवाधिकार संगठनों को आगे आकर पाकिस्तान सरकार पर दबाव बनाना चाहिए कि लंबे अरसे से अपने अधिकारों से महरूम लोगों को न्याय मिल सके वरना उनके पास पलायन व धर्मांतरण के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। मुझे इस बात का भी खेद है कि अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले जनप्रतिनिधियों के साथ सभी राजनीतिक दल इनकी आवाज उठाने में नाकामयाब रहे हैं।
-हिंदूसिंह सोढ़ा, अध्यक्ष, सीमांत लोक संगठन

Published on:
03 Jun 2022 03:03 pm