
जोधपुर।
जोजरी व आसपास की सहायक नदियों में केमिकलयुक्त पानी छोडऩे व प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों की मॉनिटरिंग के लिए गठित होने वाली स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) कार्यालय के लिए जल्द ही जगह चिन्हित की जाएगी। पुलिस विभाग की ओर से बोरानाडा में औद्योगिक इकाइयां अधिक होने के कारण इस कार्य के लिए एसीपी बोरानाड़ा को जिम्मा सौंप दिया गया है। इसके अलावा, डीसीपी वेस्ट को इकाइयों की प्रतिदिन की मॉनिटरिंग करने व रिपोर्ट बनाने के लिए जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त करने के भी निर्देश दिए गए है। एसटीएफ में एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, 4 सब इंस्पेक्टर, 3 हैड कांस्टेबल, 21 कांस्टेबल के अलावा 2 वाहन व 6 ड्राइवर्स की टीम होगी। जो 24 घंटे में 3 पारियों में काम करेगी। इकाइयों की मॉनिटरिंग की रिपोर्ट प्रतिदिन एडीजी को प्रस्तुत होगी। जो इस रिपोर्ट को एनजीटी को प्रस्तुत करेंगे।
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गत सुनवाई में दिए एसटीएफ गठन के निर्देश
गौरतलब है कि जोजरी नदी में प्रदूषण के मामले में एनजीटी में गत 17 मई को सुनवाई के दौरान एनजीटी ने पुलिस महानिदेशक को इस समस्या के समाधान के लिए एसटीएफ बनाने के निर्देश दिए थे। एनजीटी के आदेशानुसार, एसटीएफ जोजरी नदी व नालों में इकाइयों का गंदा पानी डालते मिलने पर फैक्ट्री मालिक के खिलाफ कार्यवाही करने, गंदा पानी डालने के लिए उपयोग वाहन को सीज करने व सीज वाहन को एनजीटी के आदेश के बिना नहीं छोडऩे के आदेश दिए है।
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इसलिए फोर्स गठन का किया विचार
एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि कॉमन एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीइटीपी) फैक्ट्रियों से निकलने वाले पानी को बिना उपचारित किए नदी-नालों में छोड़ रही है। इस गंदे पानी से लोगों में बीमारियां फैल रही है। सीइटीपी से समस्या समाधान नहीं होने की स्थिति में एनजीटी ने एसटीएफ के गठन का विचार किया। एसटीएफ फैक्ट्रियों की जांच के अलावा, उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने में भी सक्षम होगी।
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एनजीटी के आदेशों की पालना में एसटीएफ गठन, पोस्ट सेंक्शन व अन्य संबंधित काम सरकार के लेवल के है। यह काम होते ही एसटीएफ का गठन हो जाएगा। वैसे एडीजी सर के आदेश पर एसटीएफ भवन के लिए जगह चिन्हित करने के लिए एसीपी बोरानाड़ा को जिम्मेदारी दी गई है, जल्द ही जगह चिन्हित कर ली जाएगी।
डॉ रवि, डीसीपी