
जोधपुर. गर्मी के मौसम में वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित होने वाले पेयजल का संकट के लिए पर्यावरण प्रेमियों ने जिले के वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में स्थित जलाशयों, नाडियों व खेळियों की स्थिति का आंकलन शुरू कर दिया है। पानी की कमी से वन्यजीवों में डी - हाइड्रेशन , डायरिया जैसी बीमारियां जानलेवा साबित होती है। खेजड़ली रेस्क्यू सेंटर में सेवाएं देने वाले घेवरराम गोदारा ने बताया कि समाजसेविका कुसुमलता भंडारी के सहयोग से रेस्क्यू सेंटर के बाहर 12 गुणा 10 आकार का जलकुंड निर्माण से वन्यजीवों को राहत मिली है।
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लेंगे सहयोग
आगामी फाल्गुणी अमावस्या से सोशल मीडिया के माध्यम से वन्यजीव बहुल क्षेत्र के जलस्रोतों की स्थिति का आकलन कर व्यवस्था की जाएगी। जरूरत पडऩे पर वनविभाग और पर्यावरण प्रेमियों का सहयोग लिया जाएगा।
रामपाल भवाद, प्रदेश अध्यक्ष विश्नोई टाइगर्स वन्य एवं पर्यावरण संस्था
मार्च में होगा बजट आवंटित
खुले मैदानों में विचरण करने वाले वन्यजीवों के लिए गर्मी के दौरान पानी की कमी नहीं आने दी जाएगी। वनविभाग की ओर से मार्च के अंतिम सप्ताह तक बजट राशि आवंटित होने की उम्मीद है।
केके व्यास, सहायक वन संरक्षक माचिया जैविक उद्यान जोधपुर