जोधपुर

वर्तमान और भविष्य प्राचीन बहियों में सुरक्षित

- प्राचीन राजस्थानी बही लिपि (भाषा) कार्यशाला शुरू
less than 1 minute read
Jan 15, 2020
वर्तमान और भविष्य प्राचीन बहियों में सुरक्षित
वर्तमान और भविष्य प्राचीन बहियों में सुरक्षित

जोधपुर।

राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान जोधपुर के पूर्व उप निदेशक डॉ. डीबी क्षीरसागर ने कहा कि आज का वर्तमान और कल का भविष्य इन बहियों में सुरक्षित है। महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र के तत्वावधान में बुधवार को मेहरानगढ़ फोर्ट स्थित चौखेलाव महल में मारवाड़ की प्राचीन बहियों पर दस दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। समारोह के मुख्य वक्ता डॉ क्षीरसागर ने कहा कि आज के वर्तमान को अच्छे भविष्य में बदलना है तो वर्तमान इतिहास को सहेजकर रखना होगा। समारोह के मुख्य अतिथि जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एसपी. व्यास ने कहा कि बहियां इतिहास लेखन का बहुत बड़ा स्रोत है। इन बहियों में हमारे रीति-रिवाज, संस्कृति, परम्पराएं, निर्माण कार्य में तकनीक आदि की रोचक जानकारियां छिपी हुई है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. जहूर खाँ मेहर ने कहा कि राजस्थानी इतिहास के साधन का एक बहुत बड़ा भाग बहियां और ख्यातें ही है। यह कार्यशाला इस दिशा में बहुत उपयोगी सिद्ध होगी।

महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाष शोध केन्द्र के विभागाध्यक्ष डॉ. महेन्द्रसिंह तंवर ने महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश में संग्रहित रिकॉर्ड की जानकारी से अवगत कराया और राजस्थान राज्य अभिलेखागार बीकानेर से डिजिटालाइज्ड कर जोधपुर लाए गए 35 लाख से अधिक दस्तावेजों के बारे में जानकारी दी और बताया कि यह रिकॉर्ड अब पुस्तक प्रकाश में आसानी से शोधार्थियों के लिए उपलब्ध है।

उद्घाटन सत्र के बाद विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। कार्यशाला में दिल्ली, हरियाणा, जयपुर, बीकानेर व जोधपुर के 25 शोधार्थी व विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर डॉ. विक्रमसिंह राठौड़, डॉ. विमलेश राठौड़, सुनिल लघाटे, घर्मांशु बोहरा सहित शोधार्थी उपस्थित थे। अंत में केन्द्र की शोध सहायक डॉ. सुमित ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दिलीप कुमार नाथाणी ने किया।

Updated on:
15 Jan 2020 11:16 pm
Published on:
15 Jan 2020 11:16 pm