जोधपुर

राजस्थान हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग में घोटाला मामला, RSRDC प्रोजेक्ट डायरेक्टर समेत 3 बड़े अफसर गिरफ्तार

राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर के भवन निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल मामले में पुलिस ने RSRDC के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुरेश शर्मा, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर अजीत कुमार सांघी और विद्युत PD शिवहरे माहौर को गिरफ्तार किया है।
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Updated: 10 Sep 2026, 7:29 AM IST
rajasthan hc building scam
पुलिस गिरफ्त में सुरेश शर्मा, अजीत कुमार सांघी और शिवहरे माहौर (पत्रिका फोटो)

Rajasthan High Court New Building Scam Case: जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर के भवन निर्माण कार्य में कथित रूप से घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल के मामले में गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है। पुलिस ने बुधवार को राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम (आरएसआरडीसी) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर (पीडी) सुरेश शर्मा, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर अजीत कुमार सांघी और विद्युत प्रोजेक्ट डायरेक्टर शिवहरे माहौर को गिरफ्तार किया। पुलिस उपायुक्त पश्चिम कमल शेखावत ने बताया कि हाईकोर्ट भवन निर्माण में निम्न गुणवत्ता की निर्माण सामग्री के इस्तेमाल को लेकर प्रकरण दर्ज किया गया था।

पांच आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में

मामले की जांच के दौरान पूर्व में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पांच आरोपियों का पुलिस रिमांड पूरा होने पर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज गया है, जबकि तीन आरोपी रिमांड पर हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में कथित अनियमितता के साथ दस्तावेजों और तकनीकी रिपोर्ट की भी जांच की जा रही है। साथ ही निर्माण कार्य में बरती गई लापरवाही से राजकोष को हुए संभावित नुकसान के संबंध में भी आकलन किया जा रहा है।

220 करोड़ में बना हाईकोर्ट भवन, फिर भी निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

राजस्थान हाईकोर्ट के झालामंड स्थित नए भवन के निर्माण में कथित अनियमितताओं को लेकर करीब दो साल पहले कोर्ट ऑफिसर सेल के कर्मचारी शरद जोशी ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में भवन निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

शिकायत के अनुसार, राजस्थान हाईकोर्ट के नए भवन का निर्माण राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड (RSRDC) की ओर से वर्ष 2008 में शुरू कराया गया था। करीब 11 साल बाद दिसंबर 2019 में निर्माण कार्य पूरा हुआ। भवन के निर्माण पर लगभग 220 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि भवन के रखरखाव के लिए हर साल करीब 2 करोड़ 20 लाख रुपए का बजट निर्धारित किया जाता है। इसके बावजूद निर्माण कार्य और भवन की गुणवत्ता को लेकर सवाल सामने आए। मामले की जांच के दौरान पुलिस अलग-अलग स्तर के लोगों से पूछताछ कर रही है।

निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों और इलेक्ट्रीशियन से भी जानकारी जुटाई जा रही है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने अब तक 50 से अधिक लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया है। जांच में निर्माण से जुड़ी अन्य जानकारियां और संभावित अनियमितताओं के पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है।

Updated on:
10 Sep 2026, 7:29 AM IST
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