
जोधपुर।
लौटते मानसून का फ सलों पर मिलाजुला असर पड़ा है। जिले में गत कुछ दिनों से हुई बारिश से कुछ फसलों को फायदा पहुंचा है तो कई फसलों को नुकसान भी हो रहा है। ऐसी स्थिति में खराब होने वाली फसलों की आशंका को लेकर किसान चिंतित है। जहां मूंगफ ली में दाना बनने के समय सिंचाई की अधिक आवश्यकता के बीच बरसात से फ सल को फ ायदा पहुंचा है। वहीं कटी हुई व पकने पर आई हुई मूंग व कपास की फ सल में बरसात के बाद लगातार सुबह-सुबह ओस गिरने से इन फ सलों को नुकसान हो रहा है।
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मूंग-बाजरा की फसल खराब
जिले में 11 लाख 50 हजार हैक्टेयर में बोई गई फ सलों में से बारानी क्षेत्र की करीब 80 प्रतिशत फ सलें पहले ही खत्म हो गई थी। ऐसे में लौटते मानसून की लगातार बरसात होने के बावजूद बारानी क्षेत्र में कुछ हिस्से को छोड़कर बाकी क्षेत्र की फ सलों में कोई लाभ नहीं हुआ। इन फ सलों में लौटते हुए मानसून से उत्पादन के साथ-साथ बाजरे व मूंग की गुणवत्ता खराब होने से भी किसानों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, जैसलमेर, बाडमेर जालोर जिलों में बारानी क्षेत्र में मुख्यत: बाजरा, ग्वार, मूंग, मोठ, तिल आदि की खेती होती है। इन जिलों का खरीफ फसलों का सामान्य रकबा 48 लाख हैक्टेयर के लगभग होता है। जिसमें से 20 लाख हैक्टेयर सिंचित क्षेत्र है। वहीं शेष 28 लाख हैक्टेयर क्षेत्र बारानी है, जहां वर्षा आधारित खेती होती है इस बार मानसून कमजोर रहने के कारण बारानी क्षेत्र में करीब 15 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो सकी इसमें भी अधिकांश फसलें खराब हो गई।
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मूंगफली, अरण्डी व गाजर को मिलेगा फायदा
इस दौरान सिंचित क्षेत्र की मूंगफ ली, अरण्डी, गाजर, ग्वार में इस बरसात का पूरा फ ायदा मिलेगा। सिंचित क्षेत्र की मूंग, कपास व बाजरे की फ सलों की कटाई शुरू हो गई है। अधिकतर फ सलें पकाव पर है।
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लौटते मानसून की बारिश से मूंग-बाजरा की फसल प्रभावित हुई है। वहीं, यह बारिश मूंगफली, ग्वार, अरण्डी आदि के लिए लाभदायी रही है। जो किसानों के लिए राहत की बात है।
डॉ जेआर भाखर, उप निदेशक
कृषि विस्तार, जोधपुर