
अविनाश केवलिया/जोधपुर. साबरमती नदी की तर्ज पर रिवर फ्रंट बनाने का सपना एक बार फिर जागा है। वेपकोस कंपनी की ओर से पहले बनी डीपीआर को रद्द करते हुए अब तीन चरणों की नए सिरे से डीपीआर बनाई जाएगी। पहले नई डीपीआर का कार्य भी वेपकोस कंपनी को ही दिना जाना प्रस्तावित किया था। लेकिन अब जेडीए ने सभी कंपनियों के लिए इसे खोल दिया है।
जोधपुर के समीप जोजरी नदी की काया पलटने के उद्देश्य से पहले रिवर फ्रंट के लिए डीपीआर बनाई गई थी, लेकिन उसके बाद कार्य आगे नहीं बढ़ा। अब एक बार फिर इस प्रोजेक्ट को सीएम ने बजट घोषणा में शामिल किया तो गति मिली है। अब इसे खुली निविदा के जरिये सभी कंपनियों के लिए सार्वजनिक कर दिया गया है और इसकी लागत अब दो करोड़ के पार पहुंचने का अनुमान है।
तीन चरणों की संयुक्त डीपीआर
- चैम्बर निर्माण : पहले जब रिवर फ्रंट की डीपीआर बनी थी तो सिर्फ चैम्बर निर्माण को ही इसमें शामिल किया गया था। इस बार शहर से बहकर नदी तक जाने वाले पानी के लिए चैम्बर बनाना है। इसमें अधूरे नाले भी पूरे हो सकते हैं।
- वाटर ट्रीटमेंट : नदी में गिरने वाले पानी को पूरी तरह से ट्रीट करके ही छोड़ा जाएगा। नगर निगम के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की समीक्षा होगी और नए प्लांट भी बनेंगे।
- एरिया डवलपमेंट : बनाड से सालावास के बीच रिवर फ्रंट का बेस तैयार किया जाएगा। इसमें ग्रीन स्पेस, साफ पानी के चैम्बर और एम्यूजमेंट पार्क सहित कैफेटेरिया को प्रस्तावित किया गया है।
2 करोड़ से अधिक होंगे खर्च
जेडीए की ओर से रिवर फ्रंट डीपीआर बनाने की लागत 2 करोड़ 22 लाख रुपए है। पिछली डीपीआर एक करोड़ से भी कम लागत में बनी थी। उस समय पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 125 करोड़ थी। लेकिन अब नई डीपीआर के बाद प्रोजेक्ट कोस्ट भी बढऩे की आशंका है।
पर्यटन विकास के साथ यह समस्याएं भी दूर होगी
- प्रोजेक्ट रिपोर्ट सकारात्मक आती है तो साबरमती नदी की तर्ज पर इसका विकास होगा।
- पानी को स्वच्छ किया जाएगा, इससे प्रदूषण की समस्या से निजात मिल पाएगी।
- चैम्बर निर्माण से शहर की ड्रेनेज समस्या का स्थाई समाधान हो सकेगा।
- इको-ट्यूरिज्म का एक नया केन्द्र बन सकेगा।
पहले यह था डीपीआर में
- 31 किलोमीटर का रिवर फ्रंट विकसित करने का प्रस्ताव
- 500 मीटर के दायरे में नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित किया था
- 127 करोड़ था प्रोजेक्ट का कुल बजट
इनका कहना...
पहले वेपकोस की ओर से डीपीआर बनाई जानी थी। लेकिन काम महंगा लगा तो अब अन्य कंपनियों को भी इसमें आमंत्रित किया गया है। तीन चरणों में काम होगा।
- संदीप माथुर, अधिशासी अभियंता, जेडीए (आरओबी डिवीजन)