
जोधपुर. राजस्थान में गिद्धों की मृत्यु की मूल वजह और उससे होने वाले आर्थिक नुकसान का आप कैसे आकलन करेंगे... 1857 की क्रांति का स्वाधीनता संग्राम से क्या ताल्लुक है, इसकी गांधी युग से तुलनात्मक विवेचन करें...यह राजस्थान लोक सेवा आयोग के नए साक्षात्कार पद्धति का नमूना है। आयोग ने अभ्यर्थियों का संपूर्ण ज्ञान और व्यक्तित्व परखने के लिए प्रश्न पूछने के तरीके में बदलाव किया है। इसके चलते अभ्यर्थियों को अब गहन अध्ययन करना जरूरी होगा।
अब तक साक्षात्कार में यों पूछे जाते सीधे सवाल
-इसरो ने पहला पीएसएलवी-जीएसएलवी कब लॉन्च किया, इससे भारत पर क्या फर्क पड़ेगा?
- पंडित नेहरू को आधुनिक भारत का निर्माता क्यों कहा जाता है?
- देश में किस वर्ष में इंटरनेट की शुरुआत हुई, इससे क्या बदलाव हुए?
पूरा पढऩा जरूरी
राजस्थान लोक सेवा आयोग ने साक्षात्कार प्रक्रिया को विश्लेषणात्मक और गहन अध्ययन परक बनाने का फैसला किया है। लिहाजा आयोग ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी)के मॉडल को अपनाया है। यूपीएससी में आईएएस और अन्य भर्तियों में विशेषज्ञ और सदस्य विश्लेषण और तार्किक ज्ञान वाले सवाल पूछते हैं। इसमें अभ्यर्थियों के संपूर्ण ज्ञान की जांच, विषय की समझबूझ, त्वरित समस्या समाधान, प्रशासनिक क्षमता जैसे गुण उजागर होते हैं।
अब यह होगा सवाल पूछने का नया तरीका
-राजस्थान में लगने वाली पेट्रोलियम रिफाइनरी से क्या आर्थिक, सामाजिक लाभ होंगे?
- क्रूड ऑयल की खरीद और शोधन के खर्चों और पर्यावरणीय प्रभाव को आप कैसे देखेंगे?
- प्रशासनिक नौकरी के दौरान जिले में आपकी भूमिका क्या वेतन लेने वाले अफसर तक सीमित होगी या संबंधित जिले के आर्थिक,भौगोलिक विकास में भी भागीदार बनेंगे?
साक्षात्कार अंक विभाजित
आयोग ने सौ अंकों के साक्षात्कार को अलग-अलग विभाजित किया है। संवीक्षा परीक्षा में प्राप्तांकों का चालीस प्रतिशत भरांक की गणना (40 अंक) अकादमिक के 20 अंक और साक्षात्कार के 40 अंक होंगे। अकादमिक के 20 अंकों का भी वर्गीकरण किया गया है। इसके तहत विशिष्ट योग्यता (75 प्रतिशत) प्रथम श्रेणी, द्वितीय श्रेणी और केवल उत्तीर्ण की श्रेणी शामिल की गई है।