
केआर मुंडियार/जोधपुर. यदि चेहरे पर चमड़ी के रंग की फुंसी जैसे दाने उभर रहे हैं, तो तुरंत इलाज करवा लें। अन्यथा आपके चेहरे की सुन्दरता बिगड़ सकती है। दानों के फूटने पर यह बीमारी परिवार के अन्य लोगों को भी हो सकती है, क्योंकि इसका संक्रमण एक से दूसरे में तेजी से फैलता है। चर्म व रति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. दिलीप कच्छावाहा के अनुसार इस बीमारी को मोलस्कम कॉन्टेजियोसम कहते हैं। यह वायरल इंफेक्शन है। जो पॉक्स वायरस से फैलता है। चेहरे या गर्दन के आस-पास दाने उभरते हैं। इससे न तो खुजली होती है और न ही ये दानें शरीर को तकलीफ देते है। यदि दानों या फुंसी को नहीं फोड़ा जाएं तो यह बीमारी 6 से 8 माह में ऑटो इम्यूनिटी से स्वत: ठीक हो सकती है, लेकिन दाने फूट जाने पर संक्रमण का खतरा अधिक हो जाता है। फैलने पर चेहरे की सुन्दरता बिगड़ सकती है। इसलिए ऐसे दाने उभरने पर तत्काल इलाज लेना चाहिए। कुछ समय से शहर के मथुरादास माथुर अस्पताल की चर्म व रति रोग ओपीडी में प्रतिदिन 30 से 50 रोगी चेहरे पर फुंसी या दाने के आ रहे हैं।
यह है इलाज
चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. कच्छवाहा के अनुसार मोलस्कम कॉन्टेजियोसम के दानों के इलाज में विशेष प्रकार का केमिकल काम में लिया जाता है, जो सप्ताह में एक बार दानों पर चिकित्सा एक्सपर्ट के जरिए ही लगाया जा सकता है। दानों के इलाज में केमिकल या इलेक्ट्रिक बर्न ही कारगर उपाय है। ऐसे दाने होने पर मरीज बाजार से कुछ भी मलहम आदि खरीद कर न लगाएं, इससे चेहरे की सुन्दरता बिगड़ सकती है। ऐसे मरीज अविलम्ब चर्म रोग विशेषज्ञ चिकित्सक से ही परामर्श लें।
ऐसे फैलती है बीमारी
यह एक-दूसरे के सम्पर्क में आने, एक-दूसरे के तोलिया-तकिया व कपड़े यूज करने, एक-दूसरे को छूने से अधिक फैलती है। इसका प्रभाव बच्चों पर ज्यादा देखने को मिल रहा है। इस रोग में चेहरे या गर्दन, हाथों के आस-पास ही दाने उभरते हैं। बड़ों में ऐसे दाने चेहरे के अलावा सीने और अन्य जगहों पर भी हो जाते हैं।