
अविनाश केवलिया/जोधपुर. नगरीय निकायों के कई ऑनलाइन कार्य स्मार्ट तरीके से करवाने के लिए तीन वर्ष पहले शुरू किया स्मार्टराज प्रोजेक्ट फेल हो गया। जिस फर्म को प्रदेश के सभी निकायों में कार्य करने के आदेश दिए उसने अधिकांश शहरों में काम ही शुरू नहीं किया। जहां किया वहां तय समय सीमा में नहीं हुआ। इससे निकायों की कार्यप्रणाली प्रभावित होने के साथ आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्मार्टराज के तहत ऑनलाइन कार्य संपादित करने के लिए प्रदेशभर के बड़े नगर निगम से लेकर छोटी नगरपालिकाओं का काम एक ही फर्म को दिया गया। लेकिन कई नोटिस और तिथियां बढ़ाने के बाद भी इस फर्म ने काम बेहतर तरीके से नहीं किया। अंतिम मियाद खत्म होने पर प्रोजेक्ट की समीक्षा के लिए बनी कमेटी ने दो दिन पहले जयपुर में हुई बैठक में फर्म का ठेका निरस्त करने के साथ कई निकायों को जरूरी काम अपने स्तर पर करवाने के निर्देश दिए हैं।
यह काम होने थे स्मार्टराज में
- ई-गर्वनेंस सभी निकायों में।
- सिंगल स्टेट लेवल सॉफ्टवेयर सोल्यूशन देना था।
- सिंगल विंडो सर्विस आमजन को कहीं से भी देने का उद्देश्य था।
- सभी 187 निकायों का वेब पोर्टल तैयार करना था।
- निकायों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता व विश्वसनीयता बढ़ाना।
इनमें होना था काम
- श्रेणी अ के 7 नगरनिगम
- श्रेणी ब की 25 नगर परिषद
- श्रेणी स के 43 नगरीय निकाय
- श्रेणी द के 112 निकायों में काम होना था
क्या रही स्थिति
कुल 187 नगरीय निकायों में से 56 निकायों में स्मार्टराज प्रोजेक्ट का कोई काम शुरू नहीं हुआ। जिन 131 निकायों मे काम शुरू हुआ वहां भी कुछ ही मोड्यूल शुरू किए। इससे कई निकायों में कामकाज प्रभावित हुए।
अब यह करना है निकायों को
सभी निकायों को अपने स्तर पर स्मार्टराज प्रोजेक्ट के काम पूरे करवाने होंगे। इसमें यू-डी टैक्स वसूली, लीज राशि वसूली भी शामिल है। सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए सॉफ्टवेयर भी निकायों को ही बनाना होगा।
जोधपुर में यह हो रहा था काम
जोधपुर नगर निगम में कई कार्य पारदर्शिता के साथ करने में परेशानी आ रही थी। स्मार्टराज प्रोजेक्ट में केन्द्रीयकृत टेंडर होने से कई काम नहीं हो पा रहे थे। स्थानीय स्तर पर एनआइसी को सैलेरी सहित कई कार्य दिए थे।
इनका कहना है...
स्मार्टराज के तहत होने वाले कई कार्य रुके हुए थे। ये काम निकायों को अब अपने स्तर पर ही करवाने हैं। हमने तो यहां पहले से ही कुछ मोड्यूल पर काम शुरू करवा दिया है।
- सुरेश कुमार ओला, आयुक्त, नगर निगम जोधपुर