जोधपुर

neta ji subhash chandra bose ने जोधपुर के युवाओं में फूंका था स्वाधीनता का मंत्र

जोधपुर ( jodhpur news.current news ). सुभाषचंद्र बोस ( neta ji subhash chandra bose ) दो बार जोधपुर आए थे। उन्होंने यहां के युवाओं में स्वतंत्रता का मंत्र फूंका था। स्वतंत्रता सेनानी रणछोड़दास गट्टानी ने तारकप्रसाद व्यास और महावीरप्रसाद व्यास को नेताजी ( Neta ji jayanti ) से मिलवाया था। स्व.स्वाधीनता सैनानी महावीरप्रसाद व्यास ने अपने जीवनकाल में एक संस्मरण में यह बात बताई थी।  
2 min read
Jan 23, 2020
Subhash Chandra Boseand jodhpur connection
Subhash Chandra Boseand jodhpur connection

एम आई जाहिर/ जोधपुर ( jodhpur news.current news ). सफेद चोला, सफेद धोती, सफेद चादर, सन्यासियों के जैसे भगवा रंग के कपड़े के जूते और टेढ़ी टोपी। यह लिबास पहने भारत रत्न नेता जी सुभाषचंद्र बोस ( subhash chandra bose jayanti ) दो बार जोधपुर आए थे। एक बार वे ( neta ji subhash chandra bose ) तत्कालीन 'स्टेट होटल' में ठहरे थे, जो आज सेना के आफिसर्स मैस के रूप में जानी जाती है और दूसरी बार वे गिरदीकोट में आम सभा को संबोधित के लिए आए थे। उन्होंने दोनों ही बार प्रदेश के युवाओं में स्वाधीनता का मंत्र फूंका था। दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर स्वतंत्रता सैनानी और राजस्थान स्वाधीनता सैनानी समिति के समन्वयक स्व. महावीरप्रसाद व्यास ने राजस्थान पत्रिका से एक भेंट में ये संस्मरण सुनाए थे।

उन्होंने बताया था , वो ( Neta ji jayanti ) सर्दियों के दिन थे, शाम हो रही थी, लेकिन हम आजादी का सूरज उदय होने का संदेश आत्मसात करते हुए नेता जी के चेहरे को निहार रहे थे। उनसे पौन घंटे मुलाकात हुई थी। यह उनसे शाम 6 बजे से 6.45 बजे तक हुई हमारी पहली और आखिरी मुलाकात थी। दूसरी बार आने का समय याद नहीं है, क्यों कि उस समय मैं वहां नहीं पहुंच पाया था। हां इतना याद है कि दूसरी बार जब वे आए थे तो गिरदीकोट में सभा के उपरांत उनके जाने के बाद कपड़े का थान नीलाम हुआ था।

व्यास ने बताया था, अंग्रेजों के जमाने में किसी का नेता जी से मिलना किसी अपराध से कम नहीं होता था, लेकिन नेता जी का सम्मोहक व्यक्तित्व ही एेसा था कि हम युवा उनसे मिलने के लिए लालायित थे। मुझे याद है, यह 26 दिसंबर 1938 की बात है। वो मुंबई जाते समय थोड़े वक़्त के लिए जोधपुर आए थे। अंग्रेजों के जमाने में एयरफोर्स रोड पर स्टेट होटल (अब ऑफिसर्स मैस) थी, नेता जी वहीं ठहरे थे। उनके कार्यक्रम को बिल्कुल टॉप सीक्रेट रखा गया था। उस वक्त मैं 13 साल का था और सातवीं कक्षा में था। जसवंत कॉलेज में द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत मुझसे पांच साल बड़े छात्र नेता भाई (बाद में स्वतंत्रता सेनानी) तारकप्रसाद व्यास उनसे मिलने जाते समय मुझे अपने साथ ले गए थे।

उन्होंने बताया था, जब ' स्टेट होटल] के गेट पर पहुंचे तो वहांं अंदर नहीं जाने दिया गया। गेट पर सिपाही ने कहा कि साब ने किसी को भी अंदर जाने देने से मना किया है। तब हमने चुपके से अंदर संदेश भिजवाया कि उनसे मिलना है। एेसे में अंदर नेता जी के पास बैठे स्वाधीनता सैनानी रणछोड़दास गट्टानी (बाद में पूर्व सांसद ) ने उन्हें बताया कि कुछ युवा आपसे मिलना चाहते हैं। कौन होता है साब, सबको आने दोव्यास ने बताया, गट्टानी उन्हें ले कर बाहर आए। नेता जी को जैसे ही यह बात पता चली, वे फौरन बाहर आ कर गेट के बीचोबीच खड़े हो गए। आते ही वे गुस्से में बोले,इन्हें अंदर क्यों नहीं आने दिया? इस पर सिपाही ने कहा,स्टेट होटल के अंग्रेज अफसर साब ने कहा है। तब वे बड़ी ही कड़क और रौबीली आवाज में बोले,कौन होता है साब, हमारा ऑर्डर है सबको आने दो, जो मिलना चाहता है, वह अंदर आ सकता है। तब तारकप्रसाद व्यास ने उनसे कहा, स्वाधीनता के लिए युवा क्या करें, इसके लिए संदेश दें। उन्होंने बाकायदा संदेश दिया, जिस पर लिखा था- स्टूडेंट्स आर द फ्यूचर ऑफ होप (विद्यार्थी राष्ट्र के भविष्य की आशा)।

Published on:
23 Jan 2020 11:29 pm