
जोधपुर.
राजस्थान हाईकोर्ट (rajasthan highcourt) ने बिलाड़ा (bilara) कस्बे से एक युवक के साथ गई किशोरी को 21 अक्टूबर तक बालिका गृह भेजने के आदेश दिए हैं। किशोरी के परिजन ने बेटी को अपने घर ले जाने पर सांप्रदायिक स्थिति की आशंका जताई थी।
न्यायाधीश संदीप मेहता और न्यायाधीश अभय चतुर्वेदी की खंडपीठ में बिलाड़ा निवासी किशोरी के पिता की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान बिलाड़ा थानाधिकारी मनीष देव (bilara sho manish deo) ने लापता किशोरी को कोर्ट में पेश किया।
कोर्ट की पूछताछ में किशोरी ने बताया कि वह अपनी इच्छा से युवक के साथ मुंबई गई थी। उसी ने युवक को मुंबई चलने के लिए कहा था। लेकिन अब उसे इसका पश्चाताप है और कोर्ट उसे अपने परिजनों के घर भेज सकता है।
परिजन ने कोर्ट के समक्ष यह आशंका जताई कि बेटी को अभी घर ले जाने की स्थिति में सांप्रदायिक स्थिति बन सकती है। हालांकि, थानाधिकारी ने ऐसी आशंका से इनकार करते हुए कहा कि पुलिस कानून व्यवस्था की स्थिति संभाल सकती है। खंडपीठ ने परिजनों की आशंका के मद्देनजर अगली सुनवाई तक किशोरी को बालिका गृह भेजने के आदेश दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि किशोरी 21 सितंबर की रात बारह बजे बाद से घर से लापता हो गई थी। इसकी सूचना अगले दिन बिलाड़ा पुलिस थाने (bilara police station) में दी। शुरुआत में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
बाद में सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग देखने पर बिलाड़ा निवासी एक युवक के साथ उसे जाते देखा गया। याचिका में अंदेशा जताया गया कि याची की बेटी को धर्म परिवर्तन करने के बाद शादी की नीयत से अगवा किया गया है।