
जोधपुर. संभाग के सबसे बड़े मथुरादास माथुर अस्पताल में सांस की नली में सिकुडऩ की समस्या से परेशान युवा की सांस नली को दूरबीन से चौड़ा कर उसमें स्टेंट डाल मरीज को जीवनदान दिया गया। डॉक्टर्स के दावा है कि पश्चिम राजस्थान या प्रदेश में संभवत: यह पहला जटिल ऑपरेशन किया गया।
इएनटी के आचार्य डॉ. नवनीत अग्रवाल व सहआचार्य व कार्डियक थोरेसिक सर्जन सुभाष बलारा ने बताया कि गत ५ अगस्त को हादसे में घायल जगदीश (२१) घर लौटने के बाद २ अक्टूबर को सांस की तकलीफ के साथ एमडीएम अस्पताल में भर्ती हुआ। सीटी स्कैन में सांस नली में सिकुडऩ पाई गई। सिकुडऩ के नीचे सांस नली में छेद किया गया। ट्रेकियोस्टोमी करने से सांस की तकलीफ बंद हो गई, मगर मरीज बोलने में असमर्थ हो गया। इस दौरान ऑपरेशन करके सिकुडऩ काटकर सांस नली को ऊपर खींचकर जोड़ा जाना था, लेकिन ये कार्य जोखिम भरा था। सांस की नली भी छोटी होने की आशंका थी। ऐसे में सांस की नली को दूरबीन से चौड़ा करके नली पर स्टेंट लगाने का निर्णय लिया गया। ऑपरेशन सफल रहा। मरीज की ट्रेकियोस्टोमी ट्यूब निकालने के बाद उसे बुधवार को छुट्टी दे दी गई। ऑपरेशन के बाद मरीज की सांस की तकलीफ दूर हो गई और वह बोलने में लगा है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. महेन्द्र आसेरी ने पूरी टीम को बधाई दी।
इन डॉक्टर्स ने किया ऑपरेशन
कार्डियक थोरेसिक सर्जन डॉ. सुभाष बलारा, इएनटी के आचार्य डॉ. नवनीत अग्रवाल, डॉ. मनोहर, डॉ. राजेन्द्र, डॉ. उमंग, एनेस्थेसिया टीम में वरिष्ठ आचार्य डॉ. राकेश करणावत, सहआचार्य डॉ. चंद्रा खत्री, डॉ. शिल्पी, डॉ. मोनिश, डॉ. श्रीदेवी, नर्सिंग कर्मचारी आशीफ इकबाल व भारती का सहयोग रहा।