
जोधपुर
उदयपुर के हिरणमगरी थाने में दर्ज धोखाधड़ी के मामले में दायर एफआइआर निरस्त करने को लेकर हाईकोर्ट में दायर याचिका की सोमवार को हाईकोर्ट में न्यायाधीश विनीत माथुर की अदालत में सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान उदयपुर पुलिस अधीक्षक कैलाशचंद्र बिश्नोई पेश हुए और उपराजकीय अधिवक्ता विक्रमसिंह राजपुरोहित के माध्यम से मौखिक पक्ष रखा, लेकिन कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक को लिखित जवाब पेश करने के निर्देश दिए। याचिका की अगली सुनवाई 22 जनवरी को होगी।
प्रकरण के अनुसार प्रकाश समदानी ने उनके खिलाफ दर्ज एफआइआर निरस्त कराने को लेकर दायर याचिका में बताया कि दोनों पक्षकारों में जमीन के भुगतान और टाइटल को लेकर निपटारा हो गया है।
उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत भी मिल गई है। इस पर हाईकोर्ट ने इस मामले में केस डायरी तलब की, लेकिन अनुसंधान अधिकारी ने समदानी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में चालान पेश कर दिया।
हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए पिछली सुनवाई में पुलिस अधीक्षक उदयपुर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। जिसकी पालना में सोमवार को उदयपुर के एसपी हाईकोर्ट में पेश हुए और मौखिक रूप से बताया कि इस मामले में जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के साथ 17 सीसी के नोटिस की कार्रवाई अमल में लाई गई है।
इस पर आदलत ने आइओ के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में अदालत के समक्ष लिखित में पेश करने के निर्देश दिए।