जोधपुर

कोरोना वायरस को समाप्त करने इस बार जोधपुर में विभिन्न समाज मनाएंगे वैदिक होली

जोधपुर सहित पूरे राजस्थान में कोरोना वायरस को लेकर जारी रेड अलर्ट के बाद विभिन्न समाज के लोगों ने कोरोना संक्रमण को खत्म करने के लिए गाय के गोबर से निर्मित उपले, लौंग, इलायची, घाय का घी, कपूर, नारियल, गुड़ आदि हवन सामग्री साथ होलिका दहन करने का निर्णय लिया है।
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vedic holi will be celebrated due to coronavirus outbreak in india
कोरोना वायरस को समाप्त करने इस बार जोधपुर में विभिन्न समाज मनाएंगे वैदिक होली

नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. सूर्यनगरी के विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से कोरोना वायरस से बचाव के लिए वैदिक होली मनाए जाने का निर्णय लिया गया हैं। जोधपुर सहित पूरे राजस्थान में कोरोना वायरस को लेकर जारी रेड अलर्ट के बाद विभिन्न समाज के लोगों ने कोरोना संक्रमण को खत्म करने के लिए गाय के गोबर से निर्मित उपले, लौंग, इलायची, घाय का घी, कपूर, नारियल, गुड़ आदि हवन सामग्री साथ होलिका दहन करने का निर्णय लिया है।

सूर्यनगरी के प्रमुख ज्योतिषियों और धर्मगुरुओं ने भी वातावरण में व्याप्त जहरीले कीटाणुओं और वायरस को नियंत्रित करने तथा वायु मंडल की शुद्धता के लिए वैदिक होली मनाना श्रेष्ठ बताया है। धर्मगुरुओं का कहना है कि वैदिक होली से न केवल पेड़ों की कटाई बंद होगी बल्कि गाय के गोबर से निर्मित उपलों के दीपन के बाद प्रज्ज्वलित अग्नि से पर्यावरण भी स्वच्छ होगा। शरद ऋतु के दौरान वातावरण में जो कीटाणु उत्पन्न होते है उन्हें नष्ट करने के लिए होली दहन की लपटे सदियों से कारगार साबित होती रही है।

सामूहिक वैदिक होली यज्ञ हो
इस बार विदेशी रोगाणु का प्रकोप को लेकर लोग आशंकित हैं। होलिका दहन गोबर के कंडे से अवश्य करें। गाय के सूखे गोबर से निकली अग्नि की लपटों के प्रभाव से समस्त बुरे और विषाक्त कीटाणुओं का सर्वनाश हो जाएगा। कोरोना वायरस से बचाव के लिए इस बार पूरे देश के लोगों को होलिका दहन को सामूहिक वैदिक होली यज्ञ के रूप में किए जाने की जरूरत है। होलिका में गाय के गोबर के कंडे, कपूर, गाय का घी आदि हवन सामग्री प्रयुक्त करने से वायु मंडल स्वच्छ होगा।
-सैनाचार्य अचलानंदगिरि

गंदगी ना जलाए, वैदिक रीति अपनाएं
होली को अगर वैदिक रीति रिवाज से मनाएं तो गोबर के कंडे, हवन सामग्री के साथ होलिका दहन करना चाहिए और त्योहार की सार्थकता बनाए रखने और पर्यावरण को बचाने के लिए किसी भी तरह की चीजों जैसे पुराने टायर, कपड़े, पेड़ों की गीली लकडिय़ों को जलाने से बचना चाहिए।
- नैनूराम सोलंकी, संयोजक सोजतिया घांची समाज विकास समिति

पर्यावरण शुद्धि का अवसर
होलिका दहन पर्यावरण को शुद्ध करने का अवसर सुनहरा अवसर है। देश में लाखों जगह होलिका दहन एक साथ होगा और इस दहन में गाय के गोबर के सूखे कंडे नारियल कपूर इलायची आदि से निकली ऊष्मा वातावरण में फैल रहे विषाक्त कीटाणुओं और वायरस को नष्ट कर पर्यावरण को शुद्ध करेगी और इस पुनीत कार्य के लिए समन्वित प्रयास की जरूरत है।
- राजेन्द्रवल्लभ व्यास, सामाजिक कार्यकर्ता

रंगों के त्योहार को इन्द्रधनुषी बनाए
कोरोना वायरस के भी से होली बदरंग न होने पाए, इसलिए जागरूक बने । होलिका दहन अवश्य करें लेकिन होलिका दीपन के समय सड़ी गली गीली लकडिय़ों, रबड़, टायर, रेगजिन, थर्माकोल, स्पंज,चमडा, कपड़ा, कागज आदि नहीं जलाना चाहिए। होली को सुरक्षित और कीटाणु नाशक बनाने के लिए गोबर के कंडों से ही बनाकर दहन करें। होली की उर्जा कोरोना और अन्य कीटाणुओं से सुरक्षित कर हम सभी को रंगों के त्योहार को और भी इन्द्रधनुषी बनाने में सहायक होगी।
- शेषराज ईटारा-सामाजिक कार्यकर्ता

निर्भय लेकिन सतर्क और सावधान रहेंं
विश्व भर को दहलने वाले रोगाणु कोरोना जैसे घातक वायरस से निर्भय रहने के लिए होलिका दहन एक सुअवसर है। त्योहार को शुद्ध भारतीय परम्परा के अनुसार मनाएं। पर्यावरण शुद्धि के लिए होलिका दहन में हवन सामग्री का उपयोग करें और कोरोना वायरस से भयभीत होने की बजाय निर्भय, सतर्क, सावधान और जागरूक रहें तो भारत को रोगमुक्त करने में महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।
-पं. रमेश द्विवेदी-प्रमुख ज्योतिषि

होलिका की लपटों से जुड़ा है विज्ञान
होली का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व भी है। होलिका दहन के दौरान प्रयुक्त हवन सामग्री से प्रज्ज्वलित अग्नि के कारण आसपास का वायुमंडल शुद्ध होता है और मौसमी व प्राकृतिक बीमारियां सदा दूर रहती हैं। होलिका दहन के विधान में आग जलाना, अग्नि परिक्रमा करते हुए नृत्य और गायन करते अग्नि परिक्रमा के दौरान अग्नि का ताप रोगाणुओं को नष्ट करता है।
- दशरथ प्रजापत, सचिव श्रीयादे माता प्रजापति समाज विकास संस्थान जोधपुर

Published on:
09 Mar 2020 12:19 pm