
जोधपुर। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने राज्यपाल कलराज मिश्र की पुस्तक संविधान, संस्कृति और राष्ट्र का लोकार्पण करते हुए अखंड भारत का एकता की सीख दी। उन्होंने कहा कि जात-पात, धर्म-क्षेत्र से ऊपर उठकर यह संदेश देना है कि हम एक है। संविधान भी हमें यही सिखाता है।
सर्किट हाउस में हुए एक सादे समारोह में उप राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान सर्वोच्च है। सभी को इसके बारे में जानना चाहिए। खास तौर पर नई पीढ़ी को। उन्होंने पुस्तक का जिक्र करते हुए कहा कि राज्यपाल मिश्र ने ग्रामीण संस्कृति पर गहरी दृष्टि रखने, जैसलमेर और सोनार किले पर संस्मरणात्मक गंभीर लेखन करने की चर्चा करते हुए कहा कि उनकी पुस्तक संविधान की भारतीय संस्कृति को समझने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। राज्यपाल मिश्र से संसद के दौर के पुराने संबंध भी उन्होंने गिनाए। ‘शिक्षा की संस्कृति’ के अन्तर्गत देश में 34 वर्षो के बाद बनी ऐतिहासिक नई शिक्षा नीति के संदर्भ में लेख है। साथ ही तकनीक आधारित आधुनिक ज्ञान के समुचित और मानवता के कल्याण के लिए वृहद उपयोग पर जोर दिया गया है। राज्यपाल ने पुस्तक में महात्मा गांधी, गौतम बृद्ध, महाराणा प्रताप, सुभाष चन्द्र बोस, डॉ भीमराव अम्बेडकर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन दर्शन पर लिखे अपने लेखों के बारे में जानकारी दी।
स्वागत उदबोधन देते हुए ऊर्जा, जल संसाधन और कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ बी.डी कल्ला ने राजस्थान की संस्कृति की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति व राज्यपाल का स्वागत किया। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद राजेन्द्र गहलोत, विधायक सूर्यकांता व्यास, कुलपति जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय डॉ प्रवीण चन्द्र त्रिवेदी, सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय उदयपुर के कुलपति प्रो. अमेरीका सिंह, कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बीआर चौधरी, महापौर उत्तर कुंती देवड़ा, महापौर दक्षिण वनीता सेठ, संभागीय आयुक्त डॉ राजेश शर्मा, पुलिस आयुक्त जोस मोहन, जिला कलक्टर इन्द्रजीत सिंह, जेडीसी कमर चौधरी व अन्य मौजूद रहे।