
पीपाड़ सिटी (जोधपुर). पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में पानी किल्लत को लेकर ग्रामीण आए दिन आंदोलन करने को मजबूर है तो वही दूसरी ओर विभागीय अधिकारियों की अनदेखी से हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है।
राज्य सरकार द्वारा गांवों को मीठे पानी की योजना से जोडऩे के लिए जलदाय विभाग द्वारा कई स्थानों पर पाइप लाइनें बिछाई गई। पानी की किल्लत से जूझते ग्रामीणों की मजबूरी का फायदा उठाकर पानी माफिया से जुड़े समाजकंटकों द्वारा मुख्य पाइप लाइनों को क्षतिग्रस्त कर दी। इसका नतीजा यह रहा कि प्रतिदिन लाखों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है। योजना से जुड़े अधिकारियों की शिथिलता से अवैध पानी चोरी करने वालों की चांदी हो रही है।
पीपाड़ रोड से मलार मुख्य मार्ग किनारे अवैध कनेक्शन करने के दौरान मुख्य लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। जिससे काफी पानी रिसाव हो रहा है। लगातार पानी के बहाव से खेत पानी के तालाब में परिवर्तित हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि पीपाड़ रोड से रतकुडिय़ा को जोडऩे वाली मुख्य पाइपलाइन में कई स्थानों पर लोगों द्वारा अवैध कनेक्शन किए जा रहे हैं। कई स्थानों पर प्रतिदिन सैकड़ों लीटर मीठा पानी बहकर बर्बाद हो रहा हैं। इससे सरकार को लाखों रुपए की हानि हो रही है। इतना ही नहीं सडक़ निर्माण कार्य में लगे निजी ठेकेदार के कर्मचारी भी बेझिझक पानी के टैंकर भरकर अपना हित साध रहे हैं।
मुख्य मार्ग स्थित इस स्थान पर प्रतिदिन कई अधिकारी एवं स्थानीय कर्मचारी गुजरते है। ऐसे में मामले में जवाबदारों की चुप्पी विभागीय कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रही है। ग्रामीणों ने बताया ठेकेदार द्वारा प्रतिदिन 6 से 7 टैंकर इस स्थान से भरे जा रहे हैं। जो कई घरों की प्यास बुझा सकते है।
जीएलआर में माह में एक बार ही पानी आता है
पीपाड़ रोड के नजदीकी गांव देवातड़ा स्थित बायासा बाबजी की ढाणी में स्थित जीएलआर में महीने में एक बार ही पानी छोड़ा जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि इस मामलों से उच्च अधिकारियों को कई बार अवगत करवाया जा चुका है लेकिन पानी की आवक कम होने का हवाला देकर अधिकारी पल्ला झाड़ लेते है। व्यवस्था नहीं सुधरने की स्थिति में ग्रामीणों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
सालवा खुर्द में भी पानी को तरसते ग्रामीण
ग्राम पंचायत में सरपंच कृपाल राठौड़ ने बताया कि पानी की कम आवक से परेशान ग्रामीण रोज शिकायत लेकर पहुंच रहे है। यहां 20 दिनों में एक बार ही पानी छोड़ा जाता है जो कि घरेलू उपयोगिता की तय सीमा से बहुत कम है। राठौड़ ने बताया कि इस मामले को लेकर जनसुनवाई सहित विभिन्न माध्यमों से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है लेकिन समस्या ज्यो की त्यो है।