
जोधपुर. कोरोनाकाल में भी निजी स्कूलें अपने हरकतों से बाज नहीं आ रही। अलग-अलग मद में फीस मांगने वाली निजी स्कूलों में कोरोनाकाल में मूलभूत सुविधाओं का खर्च आधा हो गया है। निजी स्कूलों में पानी, बिजली, रखरखाव सहित अन्य खर्च मिलाकर करीब 1 लाख रुपए प्रतिमाह व्यय होते थे, जो इन दिनों 50 हजार पर आकर सिमट गए हैं। उसके बावजूद बंद स्कूल में निजी स्कूलों को पूरी फीस चाहिए। कक्षा-कक्षों, ऑफिस समेत तमाम खर्चें पूरी तरह से आधे हो चुके है। शहर की कई स्कूलों ने अभिभावकों से फीस की दूसरी इंस्टॉलमेंट मांग ली है। जिसमें किसी प्रकार की रियायत नहीं दी गई है।
पहले स्कूल चलती थी 7-8 घंटे, अब चलती है महज 4 घंटे
पूर्व में निजी स्कूलें 7-8 घंटे चला करती थी। इन दिनों निजी स्कूल महज 4 घंटे चल रही है। कई स्कूल अपने स्टाफ को बुलाकर उनसे वीडियो बना रही है। ये वीडियो अभिभावकों व बच्चों को सोशल मीडिया पर गु्रप बनाकर उन्हें भेजे जा रहे है। जबकि इस पूरे क्रियाकलाप में 4 घंटे से अधिक निजी स्कूल नहीं चल रहे।
सोशल साइट्स से डाउनलोड कर भेज रहे बच्चों को वीडियो
कई स्कूल अपने स्टाफ को स्कूल नहीं बुला रही। इन स्कूलों के शिक्षक स्कूल के पैसे या खुद के इंटरनेट डाटा खर्च कर ऑनलाइन सोशल साइट्स पर मौजूद वीडियो डाउनलोड कर अभिभावकों को भेज रहे है। जबकि इनमें स्कूल व शिक्षक अपना किसी प्रकार का ब्रेन खर्च नहीं कर रहे।
किस मद में कितने पैसे बचे
बिजली- अनुमानित 50 हजार रुपए
स्टेशनरी-15000
मरम्मत व रखरखाव-3 लाख रुपए
सफाई व संबंधित सामान-30 से 40 हजार रुपए
सांस्कृतिक कार्यक्रम व स्पोट्र्स गतिविधि-4 लाख रुपए