
बिलाड़ा (जोधपुर). इस बार प्रकृति की मेहरबानी रही, मौसम अनुकूल रहा, सर्दी का असर लगातार बने रहने से इस बार खेतों में खड़ी रबी की उपज जोरदार है वही गेहूं की उपज रंगत पकड़ चुकी है। उम्मीद की जा रही है कि इस बार क्षेत्र में गेहूं का बम्पर उत्पादन होगा, तथा मंडी में गेहूं सस्ता मिल सकेगा। ऐसा मौसम के अनुकुल रहने के कारण गेहूं की पैदावार अच्छी होने की उमीद है।
कृषि विभाग भी नावाकिफ नहीं है
अधिकारियों का मानना है कि पिछले कई वर्षों से इस बार किसानों को गेहूं का अच्छा उत्पादन मिलने वाला है। इसके लिए वे मौसम के लगातार अनुकूल बने रहने को श्रेय देते है ।
प्रसिद्ध है बिलाड़ा की फार्मिक कणक
बिलाड़ा के किसानों द्वारा उत्पन्न की जाने वाली उन्नत किस्म है। फार्मिक कणक के दाम जिले भर में अन्य होने वाली किस्मों के गेहूं से अधिक ही होते है। यह फार्मिक कणक गंगा नगर के नहरी क्षेत्र में पैदा होने वाली कणक की ही तरह चमक वाली तथा आटे से भरपुर होती है। दाने की साईज भी अन्य किस्मों के गेहंू दानों से बड़ी होती है। वैसे गेहूं दो हजार रुपए प्रति क्विंटल से बाईस सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से आम तौर पर बिकते है, लेकिन फार्मिक कणक पच्चीस सौ रुपए प्रति क्विंटल से उपर के दामों पर ही बिकती है।
गुठलियों के भी दाम
फार्मिक कणक के उत्पादन पर यह कहावत भी सच उतरती है कि 'आम के आम गुठलियों के दाम`। यानी खेतों में जितने क्विंटल कणक का उत्पादन होता है उतने ही वजन का 'खाखला` (गेहूं का सूखा चारा) भी उतरना है, क्योंकि फार्मिक कणक की ऊंचाई लगभग चार फिट से उपर हो जाती है तथा पशुपालक इस खाखले के साथ रिजगे की कुतर मिलाकर अपने मवेशियों को खिलाते है। यह खाखला भी लगभग एक हजार रुपए क्विंटल बिकता है।