महज 21 साल की उम्र में अयोध्या के लिए किया था कूच, 18 माह जेल में रहने के बाद आज भी रामंमदिर के निर्माण की लगाए है आस
कानपुर। राममंदिर के आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले कारसेवक व भाजपा के पार्षद नवीन पंडित ने मंगलवार को नगर निगम में एक बैठक के बाद कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत अयोध्या में राममंदिर के निर्माण को रोक नहीं पाएगी। 2018 में रामलला त्रिपाल के बजाए एक भव्? मंदिर ?? में विराजमान होंगे। कोर्ट करोड़ों रामभक्तों के पक्ष में फैसला सुनाएगा। यदि निर्णय में देरी आती है तो मोदी सरकार लोकसभा और राज्यसभा में एक बिल पास कर मंदिर की आधारशिला रखे। 10 अप्रेल के बाद भाजपा का दोनों सदमों में पूर्ण बहुमत हो जाएगा। कारसेवक ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में कई ऐसे लोग विराजमान हैं, जिनकी सोंच जिन्ना से मिलती जुलती है। इन्हीं में से एक हैदराबाद के सांसद औवैसी हैं जो एक 47 से भी खतरनाक औजार हैं। औवैसी यदि कभी कानपुर आते हैं तो उन्हें सरदह के पास इस रामभक्त से पहले दो-दो हाथ करना पड़ेगा। हम ऐसे व्यक्ति को अपने शहर के अंदर नही घुसने दे सकते जो देश बांटने का बात करता है। इसलिए वह अपनी नफरत की सियासत हैदराबाद तक ही सीमित रखें।
छत से लगा दी छलांग, पहुंच गए अयोध्या
कारसेवक नीवन पंडित ने बताया कि उस वक्त हमारी उम्र महज 21-22 साल की थी। रथ लेकर आड़वानी निकल पड़े तो कानपुर से कारसेवकों का जत्था थी अयोध्या के लिए कूच कर गया। हमारे पिता ने घर के अंदर हमें बंद कर दिया, लेकिन अपने प्रिय अराध्य पुरूषोत्तम राम के मिंदर के लिए हम छत से छलांग लगा दी और पैदल ही जाजमऊ पहुंच गए। वहां कुछ कारसेवक मिले और उन्होंने हमें चार पहिया वाहन में बैठा लिया। घटना की जिक्र करते हुए पंडित ने बताया कि सुबह होते ही उत्साह से लबरेज कारसेवक सारी बैरीकेडिंग तोड़ते हुए अंदर पहुंच गए. जो जिधर से जगह पाया उधर से ही ढांचे के ऊपर चढ़ गया। किसी के हाथ में कुछ था नहीं लेकिन उत्साह इतना प्रबल था कि ईंट-पत्थर जो मिला उसी से ढांचा तोड़ना शुरू कर दिया और देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में कारसेवक ढांचे के ऊपर चढ़ गए और कुछ घंटों के भीतर मस्जिद ध्वस्त कर दी गई। अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 की घटना को बयान करते हुए 50 वर्षीय कारसेवक व भाजपा पार्षद नवीन पंडित इतने आवेश में आ जाते हैं, मानो वही विवादित ढांचा उनके सामने खड़ा हो, और वो उसे ध्वस्त करने को आतुर हों। अपने को आज भी वह कारसेवक ही मानते हैं और श्रीराममंदिर के निर्माण के लिए कानपुर में आंदोलन चला रहे हैं। उनकी यही खूबी के चलते गोविंद नगर की जनता प्यार करती है और लगातार चौथी बार पार्षद का चुनाव जितवाकर सदन भेजा है।
कारसेवकों के चलते डर गए थे नेता-साधू
नवीन पंडित कहते हैं, “उस वक़्त कारसेवकों का उत्साह इतना प्रबल था कि उसी ताक़त से सब कुछ हो सका। न तो किसी का निर्देश था, न किसी की योजना थी, न ही किसी ने कुछ समझाया कि आप लोग आए हैं तो कुछ करके जाइए और न ही किसी को इसका कोई श्रेय है। मस्जिद गिराने का केवल और केवल श्रेय कारसेवकों को है। नवीन बताते हैं कल्पना से भी ज़्यादा कारसेवक अयोध्या मे पहुंच चुके थे और मंच पर मौजूद नेताओं को ये आभास हो चुका था कि यदि अब उन्हें वापस लौटने को कहा गया या फिर उनकी इच्छा के विपरीत कोई फ़रमान दिया गया तो कारसेवक भड़क जाएंगे। उनके मुताबिक, “मंच पर भाषण ख़त्म होने के बाद कारसेवकों को दूसरी ओर मुड़ने के लिए कहा गया था, लेकिन कारसेवक सीधे राम जन्मभूमि परिसर की ओर मुड़ गए। उस समय सिर्फ़ साध्वी ऋतंभरा ने मंच से एक बात कही थी ’जो कहा जाता है, वो किया नहीं जाता और जो किया जाता है, वो कहा नहीं जाता। कहते हैं, इसी को चाहे आदेश मान लीजिए या फिर कुछ और, लेकिन इसके अलावा और कारसेवकों को कुछ नहीं कहा गया था, आज भले ही कोई कुछ दावा करे।
18 माह तक जेल मे रहे पंडित
मस्जिद गिराए जाने के बाद पुलिस ने कारसेवकों पर फयरिंग की, जिसमें कईयों की मौत हो गई। वहीं हजारों की संख्या में कारसेवक अरेस्ट कर लिए गए। नवीन बताते हैं कि उस वक्त हमारे साथ काला बच्चा भी अयोध्या गए थे और पुलिस ने हमारे साथ उन्हें भी अरेस्ट कर लिया। कानपुर के छह सौ से ज्यादा कारसेवकों को राक्षुका सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। हम कानपुर की सेंट्रल जेल में पूरे 11 माह तक रहे और पिता ने ब्याज में पैसे लेकर बड़ी मुश्किल में जमानत करवाई। जेल से आने के बाद हम भगवान राम के बताए रास्ते पर चल पड़े और गरीब और बेसहारा लोगों की मदद करने लगे। 1996 के दंगे के दौरान हमें फिर से पुलिस ने बिना कसूर के अरेस्ट कर लिया और जेल भेज दिया। सात माह तक हम जेल में रहे और जमानत पर बाहर आए। फिर क्या था जब भी कानपुर में कई स्रपदायकि हिंसा होती पुलिस नवीन पंडित को पकड़ कर थाने में बैठा लेती। पुलिस की प्रताड़ना को सहा पर अपना रास्ता नहीं बदला। हमारे साथ ***** के साथ मुस्लिम भाई भी हैं जो अयोध्या में रांमदिर के पक्ष में हैं। लेकिन देश में जिन्ना की सोच रखने वाले कुछ नेता हो गए हैं वह अपनी सियासत को चमकाने के लिए राममंदिर के निर्माण में बाधा बने हुए हैं। पर हमें पूरा विश्वास है कि 2018 में राममंदिर के निर्माण की नींव रख दी जाएगी और 2019 में भव्य मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा।
ओवैसी को नहीं आने देंगे कानपुर
भाजपा पार्षद नीवन पंडित ने दो टूक शब्दों में कहा कि ओवैसी की सोच पाकिस्तानी है और वह समाज को बांट कर अपनी सियासत चमका रहे हैं। वह कानपुर में अपनी रैली व सभा नहीं कर पाएंगे। उन्होंने अगर कानपुर की तरफ रूख करने का सोचा भी तो उन्हें नवीन पंडित से पहले मुकाबला करना होगा। ओवैसी संसद चुने जाने के बाद संविधान की कसम खाई लेकिन उसे पूरा नहीं करते। वह आाएदिन भषकाऊ भाषण देते रहते हैं, जो बहुत खतरनाक हैं। मोदी सरकार को इन पर कार्रवाई करनी चाहिए। नवीन पंडित ने बताया कि जब भी रामलला बुलाएंगे उसका यह भक्त अध्योध्या जाएगा। नवीन ने बताया कि जेल से छूटने के बाद वह घर के बजाए सीधे अयोध्या गए थे और त्रिपाल में बैठे अपने अराध्य पुरूषोत्तम श्रीराम की पूजा-अर्चना के बाद कानपुर लौटे थे।