
कानपुर. माथे पर काला टीका, सिर पर लाल पट्टी, हाथ में दुनाला बंदूक और बदन पर बागी वर्दी। कोमल हाथों में जब बंदूक थामी तो 6 लाख एकड़ में फैले इलाके में दहशत फैल गई। चंबल के बड़े-बड़े डाकू सरगना उसके बागी तेवरों के आग में पिघलते नजर आए। बीहड़ पट्टी से लेकर पूरे चंबल के चप्पे-चप्पे तक उसके नाम मात्र से ही अच्छे-अच्छों की हवा ढीली हो जाती, पर जंगल की बैंडिड क्वीन सीमा परिहार के दिल में नफरत के साथ-साथ प्यार भी था और उसने इसी दौरान एक डकैत को वो दिल दे बैठी। ये बात जैसे ही जंगल में फैली तो उसके लिए गैंगवार शुरू हो गया और उसके जान के पीछे कई डकैत पड़ गए। उसे जंगल में दुश्मनों ने घेर लिया, तो जंगल के बॉस दस्यू फक्कड़ ने उसकी रक्षा का संकप्ल लिया और निर्भय गुजर के साथ विवाह कराया। बीहड़ से डकैत और डकैती के लिए सरकार सख्त हुई और इनका काउनडाउन शुरू हुआ और एक-एक कर कई खुंखार डकैत मारे गए पर सीमा परिहार ने मौके की नजाकत को भांपते हुए हथियार डाल दिए। अपनी सजा पूरी करने के बाद सीमा समाजसेवा से जुड़ कर महिलाओं की आवाज बन गई।
लालराम ने जबरन बनाया था डकैत
सीमा परिहार ने बीहड़ में एक दर्शक तक राज किया। इस दौरान आमजनों से लेकर लालाजनों तक सब उससे खौफजदा तो थे ही, पुलिसिया महकमे के लिए भी वो ऐसा सिरदर्द बनी कि मोस्ट वॉन्टेड की फेहरिस्त में शामिल होते उसे ज्यादा दिन नहीं लगे। उसे न कानून का खौफ था और न ही पुलिस का डर। वो जब चाहे, दिन दहाड़े आती और तूफान की तरह कहर बरपा कर चली जाती। लेकिन बीहड़ की ये डकैत अपने बेटे के साथ औरैया में रहती है। सीमा कहती हैं कि हमें तो लालराम ने जबरन डकैत बनाया। हमें कई-कई दिनों तक खाना नहीं दिया गया। हमारे दिल में समाज के प्रति नफरत के बीज लालराम ने बोए। वो हमारे साथ विवाह करना चाहता था, लेकिन हमने इंकार कर दिया। इससे वो हमें मौत के घाट उतारने पर आमदा हो गया। उससे बचने के लिए हम फक्कड़ बाबा के दरबार पर गए। बाबा ने हमारी रक्षा का वचन दिया।
13 साल की उम्र में हुआ था अपहरण
इटावा जनपद के बिठौली पुलिस थाना क्षेत्र के ग्राम कालेश्वर की गढिय़ा (अनेठा) में अपने दौर में खासा दबदबा रखने वाले बलबल सिंह परिहार के पुत्र शिरोमणि सिंह की सबसे छोटी बेटी सीमा की जिंदगी इस कदर बदनुमा हो जाएगी यह शायद किसी को नहीं पता था। सीमा से बड़ी तीन बहनें और थीं इन सभी की शादी हो चुकी थी। पिता शिरोमणि सिंह औरैया जनपद के अयाना थाना क्षेत्र के ग्राम बबाइन में जा बसे। बकौल सीमा परिहार जब महज तेरह साल की थी और खेलने कूदने की उम्र थी तभी उसका रंजिशन कुख्यात दस्यु सरगना लालाराम ने उसे ऐसा अगवा किया कि उसका शुरूआती जीवन ही तबाह हो गया। इसी दौरान सीमा निर्भय गुजर को दिल दे बैठी और इसी से लालराम दस्यु सुंदरी के खून का प्यास हो गया। फक्कड़ बाबा ने यहां भाई का धर्म निभाते हुए सीमा का कन्यादान कर दस्युं निर्भय के साथ उसके Óसात फेरेÓ करा दिए।
जंगल में मां बनने वाली पहली डकैत
सीमा परिहार को ऐसी पहली दस्यु सुंदरी होने का दर्जा मिला हुआ है, जिसे गोलियों की तड़तडाहट से असमय गूंजने वाले घने और ऊबड़-खाबड़ बीहड़ों में पहली बार किसी शिशु को जन्म देकर बीहड़ की दहशतभरी वादियों में किलकारियां सुनवाने का श्रेय हासिल है। आज सीमा का यही 16 वर्षीय पुत्र जिसका नाम सांभर सिंह है, उसे सीमा पढ़ा लिखा कर डाक्टर अथवा इंजीनियर बनाना चाहती है। सीमा ने अपने दौर के कुख्यात रहे दस्यु सरगना निर्भय सिंह गुर्जर के साथ कुठारा (अजीतमल) में करीब 28 वर्ष पूर्व 5 फरवरी 1989 को सात फेरे लिए थे। 7 नवंबर 2005 को दस्यु निर्भय की हुई मौत के बाद जब सीमा परिहार ने एक पत्नी होने के नाते निर्भय का शव पुलिस प्रशासन से मांगा जहां उन्हें निराशा ही मिली, फिर भी हार न मानते हुये उसने वाराणसी जाकर गंगा जी में निर्भय की अस्थियों को विसर्जित कर पत्नी होने का फर्ज अदा किया।
2019 में लड़ सकती हैं लोकसभा का चुनाव
स्ीमा परिहार वैसे तो अपने गांव में रहकर समाजसेवा करती हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में इनके चुनाव लडऩे की बात सामने आई थी, लेकिन वह गलत साबित हुई। सीमा परिहार ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में अगर जनता हमें चुनाव लड़वाने के लिए कहेगी तो विचार जरूर करूंगी। सीमा परिहार पीएम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों की तारीफ करते हुए कहती हैं कि इनके चलते त्रिपल तलाक जैसे विकृत्ति से महिलाओं को छुटकारा मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पौने चार साल के कार्यकाल के दौरान एतिहासिक फैसले लिए जो देश के लिए अमृत बने। पीएम की विदेश नीति की भी सीमा प्रशंसा करती हैं और कहती हैं कि पाकिस्तान को हर जगह उन्होंने धूल चटाई है और उम्मीद है कि पीएम कश्मीर समस्या का निराकरण कुछ सालों के अंदर कर देंगे। फिल्मों पर जाने के सवाल पर कहा कि हां अगर कोई अच्छा किरदार मिलता है तो जरूर बॉलीबुड में फिर से काम करूंगी।