Ambulance Condition: उत्तर प्रदेश के कानपुर समेत तमाम जिलों में ऐसी एंबुलेंस चल रही है जो खुद 'बीमार' है। स्वास्थ्य विभाग गंभीर मरीजों की जान के खिलवाड़ कर रहा।
एक तरफ डिप्टी सीएम बृजेश पाठक स्वास्थ्य विभाग में हो रही लापरवाही को लेकर कड़ा रुख अपना रहे। वहीं, दूसरी तरफ एंबुलेंस लड़खड़ाती व्यवस्था पर ध्यान ही नहीं है। गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस खुद बीमार हैं। सुनकर अजीब लगेगा कि कानपुर जोन में हर तीसरी एंबुलेंस अनफिट है। कानपुर जोन में आने वाले आसपास के जिलों की भी यही स्थिति है। जिले में रजिस्टर्ड 444 में 156 यानी 38 फीसदी एबुंलेंस अनफिट मिली हैं। इसमें 47 एसी वाली हैं जिनकी फिटनेस एक साल पहले ही खत्म हो चुकी है, इसके बावजूद इनसे मरीज ढोए जा रहे हैं।
परिवहन अफसरों ने चेतावनी पत्र जारी किया है कि सात दिन के भीतर फिटनेस न कराने पर सभी को एमवी एक्ट की धारा 53 को नोटिस जारी होगा और तीस दिन के भीतर फिटनेस न कराने पर वाहनों का पंजीयन निलंबित और इसके बाद भी न कराने पर पंजीयन निरस्तीकरण का नोटिस जारी होगा। अभी तक एबुंलेंस फिटनेस का प्रमाणपत्र आरटीओ से जारी होता था पर इस साल फरवरी से नियमावली में संशोधन हुआ और प्रमाणपत्र सीएमओ द्वारा जारी किया जाने लगा। एंबुलेंस में लगे उपकरणों का फिटनेस प्रमाणपत्र सीएमओ द्वारा दिया जाता है तो वाहन फिटनेस का सर्टिफिकेट आरटीओ से जारी होता है।
क्या है फिटनेस नियम
एबुंलेंस की तय अवधि में फिटनेस न कराने पर पहले चेतावनी का नोटिस जारी होता है। इसमें दी गई सात दिन की अवधि में फिटनेस न कराने पर एमवी एक्ट की धारा 53 का नोटिस जारी होता है। इसके 30 दिनों के भीतर फिटनेस न कराने पर वाहन का पंजीयन निलंबित किया जाता है। इसके एक महीने बाद भी फिटनेस न कराने पर वाहन का पंजीयन निरस्त करने का प्रावधान है।
पंजीयन होंगे निंलबित
एआरटीओ प्रशासन कानपुर सुधीर वर्मा के अनुसार एबुंलेंस हो या स्कूली वाहनों की फिटनेस का। ये वाहन सीधे तौर पर बच्चों और मरीजों से जुड़े हैं। पिछले महीने 106 स्कूली बसों की फिटनेस न होने पर उनके पंजीयन निलंबित किए हैं। एबुंलेंस और स्कूली वाहनों की पड़ताल कराई जा रही है। फिटनेस की अनदेखी संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
एक नजर में एबुंलेंस का ब्योरा
कुल रजिस्टर्ड एबुंलेंस - 444
अनफिट की संख्या - 156
अनफिट में सरकारी एबुंलेंस - 03
चेतावनी नोटिस जारी - 147