
कानपुर. जिस एसी प्लांट के फेल होने के कारण पांच मरीजों की मौत हुई है, वह दस साल पुराना है। रखरखाव के अभाव में एसी प्लांट बीते पंद्रह दिन में तीन मर्तबा फेल हो चुका है, बावजूद मेंटीनेंस के लिए टेंडर नहीं जारी किए गए। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले न्यूरो सर्जरी विभाग का आईसीयू एसी फेल होने से दिक्कत हुई थी। बावजूद मेडिकल कालेज प्रशासन नींद में रहा और अब भयावह तस्वीर सामने है।
करार खत्म तो टेंडर ही नहीं जारी किया
वर्ष 2009 में न्यू इमरजेंसी के निर्माण के समय ही मेडिसिन विभाग की आईसीयू को बनाया गया था। उस वक्त मेडिसिन विभाग के एक एसी प्लांट लगाया गया था, जबकि दूसरा प्लांट यूरोसर्जरी और एनेस्थीसिया आईसीयू के लिए हैं। एसी प्लांट लगाने वाली कंपनी ने पांच वर्ष तक मुफ्त रख-रखाव किया, इसके बाद मेडिकल कालेज प्रशासन ने तीन वर्ष के लिए एक कंपनी से मेंटीनेंस का करार किया। बीते वर्ष यह करार खत्म हुआ तो नया टेंडर ही नहीं जारी किया गया। मेडिकल कालेज प्रशासन जरूरत के आधार पर स्थानीय इंजीनियरों और मैकेनिकों को बुलाकर काम चलाता रहा।
इस गर्मी में प्लांट की सर्विस भी नहीं हुई
मेडिकल कालेज के एक प्रोफेसर ने बताया कि प्रत्येक वर्ष गर्मी से पहले एसी प्लांट की सर्विस होती थी, लेकिन इस साल नहीं हुई। इसी कारण बीते 15 दिन में तीन मर्तबा एसी प्लांट ठप हुआ। बुधवार की रात एसी प्लांट फेल होने और मरीजों की मौत के बाद गुरुवार सुबह कुछ प्राइवेट इंजीनियर आए और उन्होंने प्लांट की एक मोटर को ठीक करने का प्रयास किया, लेकिन मोटर कुछ देर चलने के बाद फट गई। खबर मिली है कि मेडिकल कालेज से संबद्ध मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल में भी एसी प्लांट फेल है। इसी कारण वहां मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। घटना के बारे में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नवनीत कुमार कहते हैं कि आइसीयू में गंभीर मरीज ही भर्ती होते हैं। अति गंभीर मरीजों की मौत हुई है। इन मौतों का एसी से कोई लेना-देना नहीं है। हां, मेडिसिन आइसीयू का एसी प्लांट बुधवार से खराब है। प्रमुख अधीक्षक, सीएमएस व जूनियर इंजीनियर को सूचित कर दिया है। प्लांट की मरम्मत के लिए प्रयास जारी है। मरम्मत के बाद दोबारा जले कंप्रेशर को ठीक होने में एक दिन का अतिरिक्त समय लगेगा। गर्मी से वेंटीलेटर एवं अन्य उपकरण प्रभावित नहीं हुए हैं।