Cyber Fraud Gang:कानपुर में साइबर पुलिस ने खुद को सीबीआई और क्राइम ब्रांच अधिकारी बताकर ‘गंदे वीडियो’ का डर दिखाकर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया। गिरोह ने 23 से अधिक लोगों को शिकार बनाया। पुलिस ने 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
कानपुर में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां खुद को सीबीआई और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर लोगों को डराने और धमकाकर पैसे वसूलने वाले एक संगठित गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह के सदस्य खासतौर पर महिलाओं और युवतियों को निशाना बनाते थे और उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देकर ठगी करते थे। पुलिस ने इस मामले में 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
आरोपी पीड़ितों को फोन करके कहते थे—“तुम गंदे वीडियो देखती हो, तुम्हारे मोबाइल की जांच में कई आपत्तिजनक लिंक मिले हैं, तुम्हें गिरफ्तार करने के लिए टीम भेजी जा रही है, अब जेल जाना पड़ेगा।” इसके बाद वे पीड़ितों को मानसिक रूप से डराकर उनसे पैसे ट्रांसफर करा लेते थे। कई मामलों में उन्होंने बदनामी और सामाजिक अपमान का डर दिखाकर लाखों रुपये ऐंठ लिए।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में सक्रिय था और अब तक 23 से अधिक लोगों को शिकार बना चुका है। इनमें करीब 70 प्रतिशत पीड़ित महिलाएं और युवतियां हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश के पीड़ितों से ढाई से साढ़े तीन लाख रुपये तक की ठगी की गई है।
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के अनुसार, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद साइबर सेल और सचेंडी पुलिस को जांच सौंपी गई। संदिग्ध मोबाइल नंबरों की ट्रैकिंग के बाद गिरोह का खुलासा हुआ और सभी आरोपी पकड़े गए।
जांच में सामने आया कि आरोपी 10वीं और 12वीं तक पढ़े हुए हैं। वे कीपैड मोबाइल से कॉल कर खुद को सीबीआई या क्राइम ब्रांच अधिकारी बताते थे। अगर कोई सवाल करता तो कॉल काट देते थे। डराने के लिए एंड्रॉयड फोन से पुलिस सायरन की आवाज भी बजाते थे ताकि पीड़ित घबरा जाए।
सचेंडी पुलिस ने गोरेलाल, रामजी, सर्वेश सिंह, अवधेश सिंह, अभिषेक सविता, रामप्रकाश, रिंकू और कानपुर देहात के अभिषेक सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक गोरेलाल और रामजी इस पूरे गिरोह के मास्टरमाइंड हैं। सभी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
आरोपियों के पास से पांच मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, डेबिट कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस अब इस गिरोह के बैंक खातों और अन्य सहयोगियों की जांच कर रही है, ताकि पूरे साइबर नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।