
कानपुर । सोनिया और राहुल गांधी की जोड़ी ने गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा को जातीय समीकरण के चक्रव्यूह में ऐसा फंसाया की सत्ता जाते-जाते बच पाई। अब लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारी में जुटी कांग्रेस फिर से एक्शन में आ गई है और पार्टी की नजर सबसे बड़े राज्य यूपी लग गई है। जिसका आगाज भी कानपुर की धरती से प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर, गुलाब नबी आजाद, जितिन प्रसाद और आरपीएन सिंह ने कर दिया। जल्द ही सोनिया और राहुल गांधी की पहली रैली कानपुर में कराए जाने की चर्चा जोरों पर चल रही हैं। इस रैली में हार्दिक पटेल, कृष्णा पटेल के साथ ही बसपा के बड़े नेता शामिल हो सकते हैं। कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष राजाराम पाल कहते हैं कि आपातकाल के बाद पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने कानुपर से चुनावी सभा का आगाज किया था और मजदूरों के शहर ने उनकी आवाज पूरे देश में फैला दी। केंद्र में पूर्ण बहुमत से कांग्रेस की सरकार बन गई। हां राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी यहां से चुनाव की शुरूआत करती हैं तो यह तय है कि यूपी में भाजापा महज दस सीटें ही जीत पाएगी।
मिर्जापुर बेल्ट संभालेंगी कृष्णा पटेल
लोकसभा चुनाव की तैयारी कांग्रेस ने पूरी प्लॉनिंग के तहत की है। कांग्रेस की प्लॉनिंग विंग 24 घंटे भाजपा के नेताओं पर नजर रखे हुए हैं और एनडीए को किस तरह से तोड़ा जाए उस पर जबरदस्त काम चल रहा है। जानकारों की मानें तो केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की मां कांग्रेस, बसपा के साथ चुनाव के मैदान में उतर सकती हैं। कांग्रेस उनकी बेटी पल्लवी को एक सीट से चुनाव लड़ा सकती है। साथ ही कृष्णा पटेल के जरिए कुर्मी वोटर्स को अपनी तरफ लाने के लिए लगाएगी। एक कांग्रेस के नेता ने बताया कि कृष्णा पटेल और उनकी बेटी के बीच सियासत की लड़ाई के बजाए भाजपा का बैर है। कृष्णा पटेल जीते जी कभी भी भाजपा को समर्थन करने वाले के साथ नहीं खड़ी हो सकती हैं।
इसलिए कृष्णा पटेल ने भाजपा से बनाई दूरी
मां कृष्णा पटेल और बेटी अनुप्रिया के बीच सियासत की नहीं बल्कि विधारधारा के चलते रास्ते अलग-अलग हैं। कृणा पटेल गुट के नेता रामखेलावन पटेल पूर्व जिलाध्यक्ष फहेतपुर कहते हैं कि डॉक्टर सोनेलाल पटेल ने संप्रदायिक ताकतों के खिलाफ पार्टी का गठन किया और इनसे लड़ते रहे। गरीब, दलित पिछड़ों की आवाज बनें और इसका खामियाजा भी उन्हें उठाना पड़ा। रामखेलावन सन 1999 की वह तारीख याद कर सिहर उठते हैं। बताते हैं कि डॉक्टर पटेल और समर्थक पीडी टंडन पार्क इलाहाबाद में आयोजित नामांकन रैली में इकट्ठे हुए। समर्थकों की भारी भीड़ को देखकर तत्कालीन बीजेपी सरकार के ताकतवर सांसद मुरली मनोहर जोशी के इशारे पर पुलिस ने डॉक्टर सोनेलाल पटेल के साथ मौजूद लोगों पर लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस ने हमारे नेता कों इतना मारा गया कि उनके शरीर में जगह-जगह फ्रेक्चर हो गए। उन्हें एक माह तक जेल में रखा गया। बाहर आते ही वह फिर भाजपा के खिलाफ सड़क पर उतर आए। उनके निधन के बाद बेटी अनुप्रिया ने गलत विचारधारा वाले दल के साथ चली गई। इसी के कारण मां कृष्णा पटेल उनसे अलग हो गई।
कानपुर-बुंदेलखंड संभालेंगे हार्दिक
लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस हार्दिक पटेल को यूपी चुनाव प्रचार में उतर देगी। कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की 52 सीटों पर उनकी रैलियों के साथ ही रोड शो की पहले से ही रूपरेखा कानपुर और दिल्ली के बीच बैठकर तैयार की जा रही है। इन 52 में से 15 सीटें ऐसी हैं, जहां सीधे कुर्मी मतदाता हार-जीत तय करता है। कृष्णा पटेल गुट के नेना रामखेलावन पटेल कहते हैं कि हार्दिक पटेन कुर्मी समाज के युवाओं के दिल में बसते हैं और इनके आने से यह तह है कि भाजपा के साथ ही 2019 में ख्ुद केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल भी मिर्जापुर से चुनाव हार जाएंगी। रामखेलावन कहते हैं कि हम कुर्मी बाहूल्य सीट जहानाबाद में रहते हैं। पहले कुर्मी समाज के लोग नाम के आगे उत्तम, सचान, कटियार लिखते थे, लेकिन अब हालात बिलुकल विपरीत हैं। युवाओं के साथ ही घरों के बाहर नाम के आगे पटेल लिखा जाने लगा है, जो कांग्रेस व अन्य दलों के लिए शभ संके है।
पिछले साल मनाई जयंती
पिछले साल डॉक्टर सोनेलाल की जयंती के अवसर पर खुद हार्दिक पटेल दिल्ली आए थे और एक रैली में भाग लिया था। उस दिन हार्दिक पटेल ने कहा कि जैसे सरदार बल्लभ भाई पटेल ने गांधीजी की हत्या के बाद आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिय़ा था उसी तरह प्रदेश सहित पूरे देश से संघ और बीजेपी के खात्मे से ही डॉक्टर सोनेलाल पटेल के सपनों को पूरा किया जा सकता है। हार्दिक ने कहा था कि डॉक्टर सोनेलाल पटेल जिन संघर्षों के साथ जिए, जिस बीजेपी ने उनके ऊपर लाठीचार्ज करवाया, डॉ. साहब के नाम पर राजनीति करने वाले वही लोग आज बीजेपी की गोद में बैठकर डॉक्टर साहब के सपनों की हत्या कर रहे हैं। हार्दिक का इशारा अनुप्रिया पटेल की तरफ था। कुर्मी समाज के नेता अजय पटेल कहते हैं कि हमारी आबादी देश में ज्यादा होने के बावजूद हम पिछड़े रह गए। क्योंकि कांग्रेस, सपा और भाजपा ने हमें वोटबैंक की तरह इस्तेमाल किया, पर अब ऐसा नहीं होगा। युवा जागरूक हो गया है और नेता का चुनाव सोंच समझ कर करेगा।