कानपुर

विरासत के भरोसे नहीं काबिलियत के दम पर चाय वाला पीएम बना

कहा- जो कानपुर शिक्षा के लिए हब है और यहीं से पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी पढ़ लिखकर देश की राजनीति में आए।
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Updated: 4 Dec 2017, 8:48 PM IST
Vice president vainkiya Naidu
Vice president vainkiya Naidu

कानपुर. सीएसए की 19 वें दीक्षान्त समारोह में शामिल होने के लिए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू सोमवार को कानपुर पहुंचे। यहां उनका स्वागत राज्यपाल रामनाईक ने किया। इस मौके पर उपराष्ट्रपति ने स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए कहा कि विरासत के भरोसे नहीं रहे, अपने बल पर आगे बढ़े। जब एक चाय वाला देश का प्रधानमंत्री और किसान का बेटा उपराष्ट्रपति बन सकता है तो आप भी अपनी काबिलियत के दम पर शिखर को छू सकते हैं। मेरा आपसे यही कहना है कि लगन से पढ़े और देश के लिए काम करें। इस देश में प्रतिभा की अपार सम्भावनाएं हैं और विरासत के बगैर भी उच्च पदों को हासिल किया जा सकता है।
अटल जी ने यहीं पर सीखा था ककहरा
सीएसए के 19 वें दीक्षान्त समारोह में शामिल होने के लिए सेमवार को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू कानपुर पहुंचे। तय समय से करीब दो घंटे देरी से उनका हेलीकॉप्टर लैंड किया। यहां पहुंचते ही उप राष्ट्रपति ने कहा कि जो कानपुर शिक्षा के लिए हब है और यहीं से पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी पढ़ लिखकर देश की राजनीति में आए तो राष्ट्रपति रामनाथ कोविं ने भी यहीं से ककहरा सीखा। पूर्व पीएम और राष्ट्रपति को विरासत में कुछ नहीं मिला, दोनों ने अपने दम पर मुकाम हासिल किया और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इन्हीं में से हैं, जिन्होंने चाय बेचकर अपना और अपने परिवार का पेट भरा।
कईयों के नाम के आगे राम शब्द लगा
उपराष्ट्रपति ने कहा कि राम थे या नहीं थे, यह एक लम्बी बहस है लेकिन भारतीय पुरखों ने भगवान राम का अस्तित्व स्वीकार किया था और इसी कारण तमाम परिवारों में बेटों का नाम राम रखने की परम्परा पड़ी, जो आज भी जारी है। न्होने अपने सम्बोधन में भारतीय नारी के स्थान को पुरूषों की तुलना में श्रेष्ठ बताया लेकिन जब विषय को आगे बढ़ाया तो वे इसे भगवान राम तक ले आये। उन्होने कहा कि ये लोगों की अपनी आस्था है कि वे राम के होने या न होने पर बहस करें। लेकिन विपक्षी नेताओं को यह समझ लेना चाहिये कि राम का अस्तित्व होने के कारण ही कई नेताओं के नाम राम के नाम पर हैं। इनमें से महामहिम रामनाथ कोविंद , राज्यपाल रामनाईक प्रमुख हैं। कहा कि हिन्दी को पूरे देश की बोलचाल की भाषा बनाया जाय लेकिन उत्तर भारतीय जनता किसी एक दक्षिण भारतीय भाषा को सीख कर सम्पूर्ण राष्ट को एक सूत्र में पिरोने का काम करें।
यही तो भारत माता की जय
उप राष्ट्रपति ने सवाल उठाया कि कुछ लोगों को वंदे मातरम पर आपत्ति है। ऐसे लोगों से पूछा जाना चाहिए कि भारत माता की जय बोलने में क्या आपत्ति है। सबकी जय हो यही तो भारत माता की जय है। भारतीय संस्कृति के प्रति भक्ति भावना होनी चाहिए। यही देश की विशेषता है। इससे पहले समारोह के अध्यक्ष राज्यपाल रामनाईक ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा की गाड़ी अब कुछ पटरी पर आई है। सीएसए की दीक्षांत में 430 को मेडल और डिग्री दी गई। इसमें 337 छात्र और 97 छात्राएं हैं। जब हम मेडल पाने वालों की मेडल की बात करते हैं तो 17 लड़कियों ने मेडल हासिल किया और 14 छात्रों को मेडल मिले। यह औसत 45 और 55 फीसदी का है। हम छात्र-छात्रओं से अपेक्षा करते हैं कि ज्ञान संकलन, अनुसंधान जारी रहे। सफलता का कोई शार्टकट नहीं होता। असफलता से भी निराश होने की जरूरत नहीं बल्कि उसके कारण खोजो। आपको देश, समाज का ख्याल रखना होगा। उन्होंने अपनी पुस्तक चरैवेति-चरैवेति का भी उल्लेख किया। कहा कि इसका मतलब चलते-चलते रहो।

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4 Dec 2017, 8:48 PM IST
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