कभी बिजली गुल तो कभी जनरेटर के हांफने के बाद यहां अस्पताल में ठप होने वाली व्यवस्थाओं और गर्मियों में रोगियों को होने वाली परेशानी से अब निजात मिलने की उम्मीद है। इसके लिए यहां के सामान्य चिकित्सालय में अब सूर्य की रोशनी से बिजली आपूर्ति होगी।
करौली. कभी बिजली गुल तो कभी जनरेटर के हांफने के बाद यहां अस्पताल में ठप होने वाली व्यवस्थाओं और गर्मियों में रोगियों को होने वाली परेशानी से अब निजात मिलने की उम्मीद है। इसके लिए यहां के सामान्य चिकित्सालय में अब सूर्य की रोशनी से बिजली आपूर्ति होगी। नई व्यवस्था के तहत चिकित्सालय में सोलर पावर सिस्टम लगाया जा चुका हैै। इससे न केवल जिला चिकित्सालय में बिजली संकट दूर होगा, बल्कि प्रतिवर्ष बिजली पर खर्च होने वाली लाखों रुपए की राशि की बचत भी होगी। अस्पताल में समुचित बिजली व्यवस्था के लिए फिनिश सोसायटी की ओर से एसबीआई कार्ड के सीएसआर सहयोग से 150 किलोवाट का सोलर पावर सिस्टम स्थापित किया जा चुका है।
बिजली पर एक करोड़ होता है खर्चा: चिकित्सालय सूत्रों के अनुसार सामान्य चिकित्सालय में वर्षभर में तीनों भवनों (शहर व मण्डरायल मार्ग) में लगभग एक करोड़ रुपए बिजली बिल पर खर्च हो रहे हैं। लगभग 15 लाख रुपए जनरेटरों में डीजल पर खर्च हो रहे हैं। बावजूद इसके चिकित्सालय में बिजली संकट बना रहता है। बिजली गुल होने पर अस्पताल में व्यवस्थाएं प्रभावित हो जाती हैं। गर्मियों में बिजली की आंखमिचौली और लोड अधिक होने से जनरेटर भी हांफ जाते हैं, जिससे लैब, एक्सरे-सोनोग्राफी, सीटी स्कैन सहित अन्य जांचें ठप हो जाती हैं। रोगी और परिजन गर्मी से बेहाल होते हैं। फिलहाल शहर में स्थित सामान्य चिकित्सालय भवन की छतों पर सोलर पावर सिस्टम स्थापित किया जा चुका है, जबकि एमसीएच और नए भवन में भी यह सिस्टम स्थापित किया जाना है।
अस्पताल का एक भवन शहर में स्थित है, जबकि दूसरा नया भवन मण्डरायल मार्ग पर है। जहां पृथक से एमसीएच विंग भी है। तीनों भवनों में ऑन ग्रिड आधार पर सोलर पावर सिस्टम लगाए जाएंगे। ऑन ग्रिड आधार पर लगने वाले सोलर पावर सिस्टम के तहत बनने वाली बिजली में से अस्पताल में होने वाली बिजली खपत के बाद जो बिजली (यूनिट) शेष रहेगी, वो निगम को जाएगी।
इनका कहना है.....
फिनिश सोसायटी की ओर से एसबीआई कार्ड के सीएसआर सहयोग से 150-150 किलोमीटर के तीन सोलर पावर सिस्टम अस्पताल में लगाए जाएंगे। शहर स्थित अस्पताल में सोलर पावर सिस्टम स्थापित किया जा चुका है, जिससे बिजली उत्पादन भी शुरू हो गया है। इससे वर्षभर में हमें करीब एक करोड़ रुपए की बिजली की बचत होगी। साथ ही बिजली समस्या का भी समाधान होगा।
डॉ. दिनेश गुप्ता, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, सामान्य चिकित्सालय।
600 यूनिट प्रतिदिन बनेगी बिजली
सामान्य चिकित्सालय में स्थापित किए गए 150 किलोवाट के सोलर पावर सिस्टम से प्रतिदिन करीब 600 यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। अस्पताल में खपत के बाद शेष रहने वाली बिजली ऑन ग्रिड सिस्टम के तहत विद्युत निगम को दे दी जाएगी।