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SDM Kajal Meena Bribe Case: इंटरव्यू के अंश वायरल, कहा मैं बदलाव लाना चाहती हूं, अब जेल में हैं टॉपर एसडीएम

SDM Kajal Meena Bribe Case: इंटरव्यू के दौरान जब काजल से उनकी प्राथमिकताओं के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने बेहद आत्मविश्वास के साथ दो मुख्य लक्ष्य बताए थे:

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एसडीएम काजल मीणा- फाइल फोटो

SDM Kajal Meena Bribe Case: कभी देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT मंडी से बीटेक कर बदलाव की बात करने वाली और सरकारी योजनाओं को गरीबों तक पहुँचाने का दावा करने वाली RAS अधिकारी काजल मीणा आज सलाखों के पीछे हैं। नादौती (करौली) की एसडीएम काजल मीणा की गिरफ्तारी के बाद अब उनका एक पुराना मॉक इंटरव्यू वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जो उनके कथनी और करनी के बीच की गहरी खाई को उजागर कर रहा है।

इंटरव्यू में 'आदर्श', हकीकत में 'रिश्वत'

इंटरव्यू के दौरान जब काजल से उनकी प्राथमिकताओं के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने बेहद आत्मविश्वास के साथ दो मुख्य लक्ष्य बताए थे:

  1. शिक्षा (Education): उन्होंने कहा था कि शिक्षा ही वह चाबी है जिससे समाज की हर कमी को पूरा किया जा सकता है।
  2. जनकल्याण: गरीब और जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुँचाना।आज राजस्थान की जनता और सोशल मीडिया यूजर्स वही वीडियो शेयर कर पूछ रहे हैं कि क्या 60 हजार रुपये की रिश्वत और बैग में मिले 4 लाख रुपये का संदिग्ध कैश ही वह 'सकारात्मक बदलाव' था, जिसका सपना उन्होंने दिखाया था?

कैसे हुआ आदर्शों का पतन?

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई ने यह साफ कर दिया कि किताबी ज्ञान और प्रशासनिक नैतिकता में जमीन-आसमान का अंतर हो सकता है। जमीन की डिक्री जारी करने जैसे सामान्य काम के लिए एक जरूरतमंद से रिश्वत मांगना उन तमाम दावों की धज्जियां उड़ाता है, जो उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में किए थे।


ACB की इस कार्रवाई के मुख्य बिंदु:

  • रिश्वत की रकम: 50 हजार एसडीएम के लिए और 10 हजार रीडर के लिए।
  • टीम वर्क: रीडर दिनेश कुमार और सहायक प्रवीण धाकड़ के साथ मिलकर रची गई थी साजिश।
  • संदिग्ध रिकवरी: ट्रेप के दौरान 4 लाख रुपये का अतिरिक्त कैश मिलना भ्रष्टाचार की गहराई को दर्शाता है।

युवा अधिकारियों पर उठते सवाल

गोविंद गुप्ता (महानिदेशक, ACB) के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने राजस्थान ब्यूरोक्रेसी को झकझोर दिया है। सवाल यह है कि यदि IIT जैसे संस्थानों से निकले युवा और उच्च शिक्षित अधिकारी भी चंद रुपयों के लालच में अपना ईमान बेच देंगे, तो आम आदमी न्याय के लिए कहाँ जाएगा? काजल मीणा का केस आज उन तमाम अभ्यर्थियों के लिए एक सबक है जो 'सिस्टम बदलने' के नाम पर सेवा में आते हैं, लेकिन खुद सिस्टम की गंदगी का हिस्सा बन जाते हैं।

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