कटनी

पुत्र-शोक सह न सकी मां: तेरहवीं से एक दिन पहले बेटे को पुकारते ही थम गई सांसें, ऐसे छूटे प्राण…

सेमरिया में हृदयविदारक घटना, एक ही चिता पर बुझी दो पीढिय़ों की लौ, बेटे की तेरहवीं के दिन मां का अंतिम संस्कार, अब दोनों की साथ में होगी तेरहवीं

2 min read
Dec 11, 2025
Unique story of death of son and mother

कटनी. ढीमरखेड़ा के ग्राम सेमरिया में जो घटना घटी, उसने पूरे गांव, इलाके और रिश्तेदारों को झकझोर कर रख दिया। एक हफ्ते पहले बेटे को खो चुकी 80 वर्षीय मां राधाबाई गौतम ने पुत्र-वियोग को सहन न कर पाने की पीड़ा में स्वयं भी दम तोड़ दिया। बेटे की तेरहवीं के एक दिन पहले उसकी बूढ़ी मां ने बिलखते हुए कहा बेटा नारायण, यदि तू सच में मुझे चाहता था तो मुझे भी अपने पास बुला ले, तेरे बिना अब नहीं जी पाऊंगी। और यह कहते ही वह अचेत होकर गिर पड़ीं। कुछ ही पलों में उनके प्राण पखेरू उड़ गए और एक ही चिता पर दो पीढिय़ों की लौ बुझ गई।
सेमरिया गांव के शांत, सामान्य परिवार में 27 नवंबर की सुबह वज्रपात की तरह खबर आई। नारायण प्रसाद गौतम (50) का अचानक निधन हो गया। नारायण खेती-किसानी करने वाले, परिवार के एकमात्र सहारे और बेहद शांत स्वभाव के व्यक्ति थे, उनका निधन 27 नवंबर को हो गया। उनकी बूढ़ी मां राधाबाई गौतम (80), जिन्होंने उम्र के आखिरी पड़ाव में अपने बेटे को सहारा समझ रखा था, इस घटना के बाद पूरी तरह टूट चुकी थीं। हालांकि बाहर से वह सामान्य दिखती थीं, पर अंदर ही अंदर उनका हृदय बिखर चुका था।

तेरहवीं की तैयारियों के बीच मां का मौन दर्द

नारायण की तेरहवीं 5 दिसंबर को रखी गई थी। परिवार के लोग तैयारियों में लगे हुए थे। 4 दिसंबर को गंगाजी पूजन का कार्यक्रम रखा गया। नाती आलोक तिवारी ने बताया कि नानी राधाबाई उस दिन बिल्कुल स्वस्थ थीं। चल-फिर रही थीं, पूजा-अर्चना कर रही थीं। कोई सोच भी नहीं सकता था कि ऐसा कुछ हो जाएगा। लेकिन उनकी आंखों में छुपा हुआ दर्द लगातार टपक रहा था, हर क्षण बेटे को याद करते हुए।

मुझे भी अपने पास बुला ले बेटा…

4 दिसंबर को अचानक राधाबाई बिलख-बिलख कर रोने लगीं। परिजन उन्हें दिलासा दे रहे थे कि सब ठीक हो जाएगा, पर वह किसी भी तरह शांत नहीं हो रहीं थीं। फिर उन्होंने एक दर्दभरा वाक्य बोला ‘नारायण यदि तू मुझे सच्चे मन से चाहता था, तो मुझे भी अपने पास बुला ले। तेरे बिना अब नहीं जी पाऊंगी, इन शब्दों के साथ ही वे अचानक अचेत होकर गिर पड़ीं। परिवार वालों ने पानी पिलाया, दवा दी, लेकिन कुछ ही पलों में उनके प्राण-पखेरू उड़ गए। ऐसा लगा जैसे मां ने सच में बेटे को पुकारा हो, और बेटा मां को अपने पास ले गया।

बेटे की तेरहवीं के दिन मां का अंतिम संस्कार

अगली सुबह 5 दिसंबर जब परिवार वाले नारायण की तेरहवीं करने वाले थे तब परिवार पर नया पहाड़ टूट पड़ा, राधाबाई अब इस दुनिया में नहीं थीं। गांव से लेकर रिश्तेदारों तक में सन्नाटा छा गया। परिजनों ने जिस दिन बेटे की तेरहवीं करनी थी, उसी दिन बूढ़ी मां की चिता सजानी पड़ी। नारायण की असमय मौत से उनकी पत्नी और दो बच्चे सदमे में हैं। अब दादी के चले जाने से पूरा परिवार अनाथ हो गया है। रिश्तेदार और गांव वाले लगातार घर जाकर ढांढस बंधा रहे हैं, पर घर का हर कोना रोता हुआ प्रतीत होता है।

Published on:
11 Dec 2025 06:30 am
Also Read
View All

अगली खबर