
शहर में होटल कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और प्रमुख बाजारों के आसपास कई होटल संचालित हैं। रोजाना बड़ी संख्या में यात्री रुकते हैं। पत्रिका के पड़ताल में सामने आया कि कई होटलों में सुरक्षा भगवान भरोसे है। कुछ में फायर सिलेंडर ही नहीं हैं। आपातकालीन रास्ता भी बाधित मिला। समय रहते जांच नहीं हुई तो ये होटल लाक्षागृह बन सकते हैं।
शहर में 30 से अधिक छोटे-बड़े होटल और लॉज संचालित हैं। इसमें 18 बड़े होटल हैं। आग से बचाव के जरूरी इंतजाम अधूरे हैं। कइयों में फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं है। कुछ में आपातकालीन गेट तक नहीं है। होटलों में फायर सिलेंडर एक्सपायर हो चुके हैं। कई जगह आपातकालीन रास्ते पर ताला, वाहन या सामग्री रखी हुई है। तीन-चार मंजिला होटलों में ऐसी लापरवाही यात्रियों के लिए खतरा बन सकता है। शनिवार को पत्रिका ने शहर के होटलों में व्यवस्थाएं खंगाली तो कैमरे में कैद हुई अव्यवस्थाओं की तस्वीरें खुद ब खुद बयां कर रहीं हैं।
सूरजकुंड बस स्टैंड के पास स्थित होटल परिश्रम में 30 से अधिक बेड हैं। पड़ताल के दौरान यहां फायर सिस्टम नहीं मिला। सुरक्षा के नाम पर दो छोटे फायर सिलेंडर ही दिखाई दिए। होटल में आपातकालीन गेट भी नहीं है। मुख्य प्रवेश मार्ग के बीच लोहे की पाइप लगी है। इससे आवाजाही प्रभावित होती है। परिसर में गंदगी भी दिखाई दी। फॉल सीलिंग का हिस्सा भी लटक रहा है। होटल संचालक एकाम मिर्जा ने बताया कि फायर सिस्टम लगाने की प्रक्रिया चल रही है।
टाउन हॉल के सामने स्थित होटल चंद्रश्री तीन मंजिला है। यहां फायर फाइटिंग सिस्टम और आपातकालीन गेट तो दूर, फायर सिलेंडर तक नहीं मिले। आपातकालीन रास्ते के नाम पर करीब ढाई फीट चौड़ी सीढिय़ां हैं। इसी रास्ते से ऊपर आने-जाने का काम होता है। सीढि़यां इतनी संकरी हैं कि दो लोग एक साथ आसानी से नहीं निकल सकते। फॉल सीलिंग टूटी है। वायरिंग के तार लटक रहे हैं। परिसर में गंदगी भी है। संचालक अशोक अग्रवाल ने बताया कि होटल बंद करने की तैयारी है। सितंबर से बाहर जाने की योजना है।
होटल शुभारंभ में एक्सपायर सिलेंडर
होटल शुभारंभ में 15 से अधिक फायर सिलेंडर लगे हैं। इनमें से कई की वैधता करीब दो साल पहले समाप्त हो चुकी है। तीन मंजिला होटल में फायर पंप भी लगा है। लेकिन इसे चलाने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं हैं। पंप वाले स्थान पर कबाड़ रखा है। एग्जिट गेट के बाहरी हिस्से में एसी लगी हुई है। होटल में पार्किंग भी पर्याप्त नहीं है। पिछले हिस्से में बना किचन भी सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल खड़े करता है।
रेलवे पुल के पास स्थित गैस्टल इन में दूसरा प्रवेश गेट बंद है। गेट पर ताला लगा है। उसके सामने बाइक और टैक्सी खड़ी होने से रास्ता भी बाधित है। मुख्य प्रवेश मार्ग पर टाइल्स टूटी हैं। इससे आवाजाही में परेशानी होती है। तीन मंजिला होटल में फायर अलार्म, स्मोक और हीट डिटेक्टर तथा फायर पंप सिस्टम लगे हैं। लेकिन कर्मचारियों को इनके संचालन की पर्याप्त जानकारी नहीं है। रिसेप्शन पर मौजूद कर्मचारियों से भी सिस्टम की जानकारी ली गई तो वे अनजान नजर आए। संचालक से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ।
फायर एक्सटिंग्विशर : छोटी आग बुझाने पोर्टेबल उपकरण।
फायर हाइड्रेंट सिस्टम : पंप, पाइपलाइन, लैंडिंग वाल्व और होज पाइप से बना स्थायी सिस्टम।
स्प्रिंकलर सिस्टम : छत पर लगे उपकरण। निश्चित तापमान बढ़ने पर ये स्वत: सक्रिय होकर पानी छोड़ते हैं।
स्मोक और हीट डिटेक्टर : आग के शुरुआती चरण में धुआं या तापमान बढ़ने का पता लगाकर चेतावनी देते हैं।
सुरक्षा उपकरण चालू हालत में रखें।
फायर सिलेंडर की वैधता नियमित जांचें।
आपातकालीन गेट हमेशा खुला और बाधा मुक्त रखें।
निकासी मार्ग पर वाहन या सामान न रखें।
फायर पंप और अलार्म चलाने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी रखें।
कर्मचारियों को आपदा के समय यात्रियों को बाहर निकालने का प्रशिक्षण दें।
नगर निगम आयुक्त प्रियंका सिंह राजावत का कहा है कि नगर निगम के नए नियम आए हैं। होटल, लॉज का परीक्षण कराया जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी।