
सिंहस्थ 2028 की प्रस्तावित विकास योजनाओं के चलते ओंकारेश्वर में मकान-दुकान प्रभावित होने की आशंका के बीच नागरिकों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज उठाई। शुक्रवार नगर में आयोजित बैठक में शामिल लोगों ने अपनी मांगों को नहीं माने जाने पर 19 अक्टूबर को नगर बंद का आह्वान किया है।
ओंकारेश्वर में अतिक्रमण को लेकर हुई बैठक में 19 मांगों पर सहमति जताते हुए स्पष्ट किया कि वे विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर वर्षों से बसे परिवारों, मकान मालिकों, दुकानदारों और किरायेदारों की आजीविका को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। सर्वदलीय बैठक में बैठक में श्री जोड़ गणपति हनुमान मंदिर के महंत एवं सड़ दर्शन संत मंडल अध्यक्ष मंगलदास त्यागी जयप्रकाश पुरोहित, सांसद प्रतिनिधि गजेंद्र अग्रवाल, नगर परिषद में विपक्ष के नेता एवं पार्षद राजेश यादव, कांग्रेस पार्षद चंपाबाई, भाजपा की पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष माया बाई, भाजपा नगर अध्यक्ष संतोष वर्मा सहित सभी पार्षद और नगर के वरिष्ठ लोग उपस्थित थे।
बैठक में वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उदाहरण देते हुए मांग की गई कि सिंहस्थ 2028 के कार्यों से प्रभावित संपत्ति मालिकों को उनकी संपत्तियों के वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर उचित और पर्याप्त मुआवजा दिया जाए। मकान, दुकान, निर्माण और अन्य परिसंपत्तियों का मूल्यांकन स्वतंत्र एवं प्रशिक्षित अधिकृत मूल्यांकनकर्ता से कराने की मांग रखी गई। साथ ही प्रभावित संपत्तियों का निष्पक्ष सीमांकन आरआई, पटवारी और संबंधित अधिकारियों की संयुक्त टीम से मौके पर कराने तथा सीमांकन के दौरान संपत्ति मालिकों को उपस्थित रहने का अवसर देने की बात कही गई।
स्थानीय लोगों ने मांग की कि विकास कार्यों के कारण मकान या दुकान हटाए जाने की स्थिति में केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए। रजिस्टर्ड संपत्ति, शासकीय पट्टे के मकान और लंबे समय से निवास या व्यवसाय में उपयोग हो रही संपत्तियों के मामलों में लागू विस्थापन एवं पुनर्वास नीति के अनुसार पात्र लोगों को लाभ दिया जाए। किसी भी परिवार को बेघर करने या कारोबार हटाने से पहले वैकल्पिक आवास और पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
बैठक में शामिल लोगों ने कहा कि ओंकारेश्वर प्राचीन धार्मिक नगरी है और यहां की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तीर्थयात्रियों से जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है। सिंहस्थ 2028 के विकास कार्यों से सुविधाओं का विस्तार होना चाहिए, लेकिन इसके साथ स्थानीय परिवारों के आवास, व्यवसाय, सामाजिक संबंधों और आजीविका की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए। सभी ने मांगों पर प्रशासन से स्पष्ट निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उचित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार सुरक्षा की मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो नगर बंद कर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और आगे की आंदोलनात्मक कार्रवाई की जाएगी।