
- इराक-इजराइल युद्ध के बीच चीन से कॉटन नहीं आने का असर, कुछ राखियां दोगुने दाम पर
रक्षाबंधन को लेकर शहर के बाजारों में अहमदाबाद, कोलकाता, मुंबई और दिल्ली की आकर्षक राखियों की वैरायटी सज चुकी हैं। इस बार खाटू श्याम बाबा की तस्वीर वाली राखियां, बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर वाली राखियों की मांग बनी हुई है। इसके अलावा ब्रेसलेट स्टाइल और इलेक्ट्रॉनिक राखियां भी बच्चों को पसंद आ रही हैं। राखी व्यवसायी राखी व्यवसायी सोमेश बजाज और राजेंद्र दशोरे ने बताया कि बार ने बताया कि मोर पंख डिजाइन, रुद्राक्ष और मोतियों वाले ब्रेसलेट तथा भैया-भाभी राखियां लोगों को खासा आकर्षित कर रही हैं। धार्मिक आस्था से जुड़ी राखियों के साथ ही आधुनिक डिजाइन भी युवाओं की पसंद बने हुए हैं।
60 रुपए से लेकर 350 रुपए तक की राखियां
बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर वाली राखियों की मांग बनी हुई है। इसके अलावा ब्रेसलेट स्टाइल और इलेक्ट्रॉनिक राखियां भी बच्चों को पसंद आ रही हैं। दुकानदारों ने हर वर्ग और बजट को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग रेंज की राखियां उपलब्ध कराई हैं। बाजार में फिलहाल 60 रुपए से लेकर 350 रुपए तक की राखियां बिक रही हैं।
इसलिए बढ़ गए राखियों के दाम
राखी व्यवसायी आशीष बजाज का कहना है कि बाजार में बिकने वाली अधिकांश राखियों में इस्तेमाल होने वाला धागा चीनी कॉटन से तैयार होता है। वहीं भारत में तैयार होने वाली राखियों में ऊन के धागे का भी अधिक उपयोग किया जाता है। चीनी कॉटन की मांग अधिक होने के कारण इसकी आपूर्ति प्रभावित होते ही राखियों की लागत बढ़ गई। इस साल जनवरी में चीन से कॉटन की अपेक्षित खेप नहीं आने के कारण बाजार में धागे की उपलब्धता कम रही। इसके चलते राखियों के दाम बढ़ गए।