असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर या एनआरसी (नेशनल रजिस्ट्रर ऑफ सिटीजेंस ऑफ इंडिया) के लिए नागरिक प्रमाणिकता सिद्ध करने को अब वहां के निवासियों ने माध्यमिक शिक्षा पर्षद से मदद व सहयोग की गुहार लगाई है
असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर या एनआरसी (नेशनल रजिस्ट्रर ऑफ सिटीजेंस ऑफ इंडिया) के लिए नागरिक प्रमाणिकता सिद्ध करने को अब वहां के निवासियों ने माध्यमिक शिक्षा पर्षद से मदद व सहयोग की गुहार लगाई है। असम के 9 हजार निवासियों ने अपनी नागरिकता का प्रमाण देने के लिए माध्यमिक शिक्षा पर्षद से माध्यमिक सर्टिफिकेट देने के लिए आवेदन किया है। माध्यमिक शिक्षा पर्षद के पास अब तक कुल 9 हजार आवेदन पहुंचे हैं। जिनमें समस्या का निपटारा करते हुए 6 हजार आवेदनों पर सर्टिफिकेट भेजे जा चुके हैं। बाकी आवेदनों पर भी माध्यमिक शिक्षा पर्षद काम कर रहा है। असम के निवासियों को जल्द से जल्द सर्टिफिकेट उपब्ध कराए जाएंगे। ऐसे में माध्यमिक बोर्ड की ओर से उनके सहयोग के लिए प्रमाणपत्र भेजने का काम तेज गति से चल रहा है।
वर्ष १९७३ से पहले असम में नहीं था शिक्षाबोर्ड
माध्यमिक शिक्षा पर्षद के अध्यक्ष कल्याणमय गांगुली ने बताया कि असम में शिक्षा बोर्ड का गठन बंगाल के बाद हुआ है। वर्ष 1973 के पहले असम में शिक्षा बोर्ड का गठन नहीं हुआ था। ऐसे में असम के लोगों ने पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा पर्षद के तहत माध्यमिक (10वीं) की परीक्षा दी थी। मालूम हो कि असम में वर्ष 1977 में असम सेकेंडरी एजुकेशन एक्ट बनाया गया। उसके बाद से असम के निवासियों ने सेकेन्डरी बोर्ड के तहत परीक्षा दी।
बांग्लाभाषियों की संख्या है अधिक
माध्यमिक शिक्षा पर्षद के सूत्रों ने बताया कि अब तक उनके पास कुल ९ हजार आवेदन आ चुके हैं। इसमें बांग्लाभाषियों की संख्या अधिक है। मालूम हो कि बंगाल का करीबी राज्य होने के कारण असम में बंगाली बड़ी संख्या में निवास करते हैं। वर्ष 1973 के पहले जो बंगाली परिवार बंगाल से असम पलायन कर गए थे उन्होंने सेकेन्डरी की परीक्षा माध्यमिक बोर्ड के अंतरगत दी है। ऐसे में माध्यमिक बोर्ड की ओर से उनके सहयोग के लिए प्रमाणपत्र भेजने का काम तेज गति से चल रहा है।