Ganesh Chaturthi 2021: भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी यानि 10 सितंबर से गणेशोत्सव प्रारंभ हो जाएगी। इस दिन चित्रा नक्षत्र और शुक्रवार के संयोग से ब्रम्हयोग रहेगा, जो अत्यंत ही मंगलकारी माना जा रहा है।
कोरबा. Ganesh Chaturthi 2021: भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी यानि 10 सितंबर से गणेशोत्सव (Ganesh Utsav) प्रारंभ हो जाएगी। विघ्रहर्ता भगवान गणेश (Lord Ganesh) का जन्म इसी दिन हुआ था। इस दिन चित्रा नक्षत्र और शुक्रवार के संयोग से ब्रम्हयोग रहेगा, जो अत्यंत ही मंगलकारी माना जा रहा है। इस दौरान किए गए सभी कार्य सुख-समृद्धि प्रदान करने वाले होते हैं। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस बार चतुर्थी तिथि पर सुबह 11.52 से 12.42 बजे के मध्य अभिजीत मूहूर्त में भगवान गणेश प्रतिमा की स्थापना श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा।
इस बार भी सार्वजनिक गणेशोत्सव पर कोरोना गाइडलाइन (Corona guideline for Ganesh Chaturthi) के तहत सख्ती बरती गई है। इसलिए सार्वजनिक गणेशोत्सव के आयोजन को लेकर समितियां पीछे हट रही है। वहीं इस बार घरों पर ही भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर आराधना की तैयारियां प्रारंभ हो गई है। गणेशोत्सव को लेकर बच्चे और युवाओं में खासा उत्साह है।
इधर, मूर्तिकारों ने भी मिट्टी की छोटी-छोटी प्रतिमा का रंगरोगन प्रारंभ कर दिया है। ज्योतिषार्च ने बताया कि भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर ब्रम्ह और रवि योग भी हैं। गणेश चतुर्थी के समय सूर्य, बुध, शुक्र और शनि ये चार ग्रह स्वग्रही रहेंगे। गणेशोत्सव पर ऐसा योग लंबे समय बाद बन रहा है। इस अवसर पर भगवान गणेश का पूजन अत्यंत ही लाभकारी हो सकता है।
ये है शुभ मुहूर्त
ज्योतिषार्च के अनुसार चतुर्थी तिथि का प्रारंभ नौ सितंबर की रात 12.42 बजे प्रारंभ हो जाएगी, यह 10 सितंबर की रात 10.05 बजे तक रहेगी। इस दिन चित्रा नक्षत्र और ब्रम्ह योग का संयोग रहेगा। यह योग भगवान गणेश की स्थापना और आराधना करना अत्यंत लाभकारी माना गया है।
ये रहेंगे खास दिन
- 9 सितंबर : हरतालिका तीन उत्सव पर महिलाएं पति की दीघायु के लिए निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव-पार्वती की पूजन करेंगी।
- 10 सितंबर: चतुर्थी पर भगवान गणेश का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी।
- 11 सितंबर: इस दिन ऋषि पंचमी रहेगी। इस अवसर पर सप्त ऋषियों की पूजा की जाएगी।
- 14 सितंबर: इस दिन राधा अष्टमी मनाई जाएगी।
- 19 सितंबर: को अनंत चतुर्दशी व गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन होगा। अनंतदेव के रूप में भगवान विष्णु की भी पूजन की जाती है।