एम्बलेंस के पायलट फिर आंदोलन की राह पर
कोरबा. एम्बुलेंस के कर्मचारी एक बार फिर आंदोलन की राह पर हैं। न्यूनतम मजदूरी और वेतन भुगतान की तारीख निर्धारित करने की मांग को लेकर कर्मचारियों ने फिर ताल ठोक दी है।
मांगों के समर्थन में एम्बुलेंस के चालक और इमरजेंसी टेक्निक स्टॉफ ने काली पट्टी लगाकर कार्य किया। एम्बुलेंस का संचालक जीवीके करती है। इसके अधीन कोरबा जिले में 102 स्टॉफ काम करते हैं। उनका कहना है कि जेवीके की तरफ से प्रतिमाह वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
दो माह काम करने पर कंपनी एक माह के वेतन का भुगतान करती है। एक माह का वेतन अपने पास रखती है। यही नहीं वेतन भुगतान की कोई निश्चित तिथि निर्धारित नहीं की गई है। 20 से 25 तारीख के बीच वेतन का भुगतान किया जाता है। यही नहीं कंपनी ने जून में कर्मचारियों के आधे वेतन का भुगतान किया है। इससे कर्मचारियों की परेशानी बढ़ गई है।
बुधवार को एम्बुलेंस के पायलट और इएमटी ने काली फीता लगाकर कार्य किया। गुरुवार को भी काली फीता लगाकर काम करेंगे। 13 जुलाई को धरना प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद भी मांग पूरी नहीं हुई तो 16 जुलाई से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाएंगे।
कर्मचारियों के आंदोलन की राह पकडऩे से जीवीकी की परेशानी फिर बढ़ती दिख रही है। इससे कंपनी के अधिकारी चिंतित हैं। उन्हें हड़ताल की भय सता रही है।
सहमति बना पर लागू नहीं हुआ
मांगों को लेकर इसके पहले भी जीवीके पायलट और इएमटी हड़ताल कर चुके हैं। तब हड़तालियों के प्रतिनिधि मंडल की स्वास्थ्य सचिव के साथ बातचीत हुई। इसमें न्यूनतम वेतन भुगतान का मामला उठाया गया था। कर्मचारियों का कहना था कि सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन मान का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है। स्वास्थ्य सचिव ने नया टेंडर कर न्यूनतम वेतन मान को लागू करने की बात कही थी। दो माह गुजर गए, लेकिन स्वास्थ्य सचिव के आश्वासन पर अमल नहीं हुआ है। इससे भी कर्मचारियों में नाराजगी है।
पाली की एम्बुलेंस खराब
इधर, नई एम्बुलेंस नहीं आने से पुरानी एम्बुलेंस का संचालन जारी है। एक एककर एम्बुलेंस में बड़ी गड़बडिय़ों सामने आ रही है। एम्बुलेंस खराब होने से पाली में एम्बुलेंस की सर्विस बंद हो गई है। गाड़ी गैरेज में खड़ी है। जरूरत पडऩे पर कटघोरा या हरदीबाजार से एम्बुलेंस भेजा जाता है। इससे केस अटेंंड करने में समय लगा रहा है।