Fire burning: ब्रिटिश शासन काल में वर्ष 1923 में कुरासियां भूमिगत खदान खुली, भीषण आग (Huge fire) लगने के कारण 1967 में बंद की गई खदान (Coal mine closed)
बैकुंठपुर/चिरमिरी पोड़ी. ब्रिटिश शासन काल (British rule) में वर्ष 1923 में खुली कुरासिया भूमिगत खदान में भीषण आग लगने के कारण 1967 में बंद कर दी गई थी। इस भूमिगत कॉलरी (Under ground coal mine) में 53 साल से जमीन के भीतर आग धधक रही है।
वहीं कोल माइंस (Coal mine) का राष्ट्रीयकरण होने के बाद एसईसीएल चिरमिरी की कुरासियां अण्डरग्राउंड माइंस में भी 16 साल से आग लगी हुई है।
गौरतलब है कि ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1923 में यहां बस्ती बसनी शुरु हो गई थी। एनसीडीसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने वर्ष 1928 में कुरासियां कालरी में भूमिगत खदान की नींव रखी थी, जिसे डागा कंपनी के नाम से जानते थे।
वर्ष 1932 में यहां कोयला उत्पादन शुरू हुआ। इसी बीच वर्ष 1967 में आग लगने से कुरासिया भूमिगत खदान को बंद कर दिया गया। आग पूरी तरह से नहीं बुझ पाने के कारण 53 साल से जमीन के अंदर यहां आग धधक रही है।
एसईसीएल की कुरासिया भूमिगत खदान भी 2004 से धधक रही है। गौरतलब है कि वर्ष 2010 में अंजनहिल भूमिगत माइंस बरतुंगा में विस्फोट (Blasting) के बाद आग लगी हुई है।
तीन बार पड़ चुकी जमीन में भयंकर दरार
1. वर्ष 2008 में पुराने एसईसीएल जीएम कार्यालय के सामने कॉलोनी में जमीन पर दरार पड़ी थी। उस समय 25 क्वार्टर हटाए गए थे।
2. वर्ष 2013 में भारत व इंडियन ऑयल गैस गोदाम के पास आग लगने के कारण जमीन पर दरार पड़ी थी। इससे गोदाम को अन्यत्र स्थानांतरित किया गया था।
3. 1 फरवरी 2021 को हल्दीबाड़ी वार्ड क्रमांक-12 में संचालित स्टेट बैंक के समीप (महुआ दफाई) में जमीन पर करीब 100 मीटर दरार पड़ गई है। इससे 39 परिवार को अस्थायी रूप से अन्यत्र शिफ्ट किया गया है।
विस्फोट होने की अक्सर आती हैं आवाज
नगर निगम चिरमिरी के 40 वार्डों में करीब 80 हजार लोग निवासरत हैं। एसईसीएल कुरासिया अण्डरग्राउंड माइंस में आग लगने के बाद इसे बंद कर दिया है। लेकिन खदान बंद करते समय सुरक्षा मापदंडों का पालन नहीं किया गया।
सिर्फ माइंस के मुहाने को ईंट से जोड़ा गया। इन क्षेत्रों में जमीन के भीतर विस्फोट जैसी आवाज सुनाई देती रहती है। बारिश के मौसम में चिरमिरी में जगह-जगह धुआं निकलता है। अवैध कोयला खुदाई भी हो रही है।
1967 में आग लगने से बंद हुई थी खदान
कुरासिया खदान 1967 में आग लगने के कारण बंद हुई थी। आज से लगभग 53 साल पहले ही खदान में डीपलेयरिंग का कार्य हुआ था।
घनश्याम सिंह, महाप्रबंधक एसइसीएल चिरमिरी
पहले भी हुए हैं हादसे, 18-20 मकान धंसे थे
पहले भी ऐसे हादसे हुए हैं। पुराने जीएम कॉम्पलेक्स की कालोनी में लगभग 18-20 घर जमीन में धंस गए थे।
लिंगराज नाहक, क्षेत्रीय महामंत्री एटक चिरमिरी