कोरीया

आंध्रा के लाल चंदन से सजेगी छत्तीसगढ़ की धरती

- प्लांटेशन करने १० हेक्टेयर जमीन चिह्नित, एक पेड़ से २० किलो तक लकड़ी निकलेगी, जिसकी कीमत ५-६ लाख होगी - कोरिया वनमंडल के बैकुंठपुर परिक्षेत्र आनंदपुर नर्सरी मिनी सीडलिंग प्लांट में पौधे हैं, जल्द प्लांटेशन होगा, कोरिया की नर्सरी में २५०० पौधे तैयार।
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Oct 21, 2022
आंध्रा के लाल चंदन से सजेगी छत्तीसगढ़ की धरती
आंध्रा के लाल चंदन से सजेगी छत्तीसगढ़ की धरती

बैकुंठपुर(योगेश चंद्रा)। कोरिया में तैयार आंध्र प्रदेश के लाल चंदन से बहुत जल्द छत्तीसगढ़ महकेगा। बैकुंठपुर परिक्षेत्र आनंदपुर नर्सरी मिनी सीडलिंग प्लांट में आंध्रा से लाल चंदन के बीज मंगाकर करीब ढाई हजार पौधे तैयार किए गए हैं। एक से दो साल में २० हजार तक लाल चंदन के पौधे तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
जानकारी के अनुसार तमिलनाडू की सीमा से लगे आंध्र प्रदेश के चार जिले नेल्लोर, कुरनूल, चित्तूर, कड़प्पा की शेषाचलम पहाडिय़ों में लाल चंदन के पेड़ मौजूद हैं। पेड़ की औसत ऊंचाई 8 से 11 मीटर तक होती है। इसका घनत्व अधिक होता है और पानी में डालने से डूब जाती है। यही लाल चंदन की लकडिय़ों की असली पहचान है। कोरिया वन मंडल के आनंदपुर फॉरेस्ट नर्सरी में प्रयोग के तौर पर महाराष्ट्र से बीज मंगाकर लाल चंदन के बीज उगाए गए हैं। वर्तमान में बीजों से करीब ढाई पौधे तैयार किए गए चुके हैं। लाल चंदन को विशेष संरक्षित वन क्षेत्र में प्लांटेशन कराया जाएगा। लाल चंदन के लिए बहुत सावधानियां रखी जाती है। पौधों को हमेशा नमी और छांव दार वनभूमि में रोपण नहीं करना है। भविष्य में आंध्रा के लाल चंदन से पूरा छत्तीसगढ़ महकेगा। वहीं कोरिया में तैयार सफेद चंदन के पौधे रायपुर, बिलासपुर सहित अन्य स्थानों में वीवीआईपी के बंगले में शोभा बढ़ा रहे हैं। सफेद चंदन के पौधे सिर्फ कोरिया व मनेंद्रगढ़ वनमंडल में तैयार होते हैं।

महाराष्ट्र से लाल चंदन के बीज मंगाए, शतप्रतिशत अंकुरित
लाल चंदन के पौधे शुरुआत में लातेदार टहनियों में विकसित होते हैं। इसलिए सूखी लकड़ी के सहारे की जरूरत पड़ती है। लाल चंदन ५ से ४५ डिग्री तक गर्मी में आसानी से हरा-भरा रहता है। खास बात यह है कि लाल चंदन को बड़ा करने रासायनिक खाद का उपयोग नहीं करते हैं। जैविक खाद वर्मी कंपोस्ट से अंकुरण से परिपक्व होते तक लाभकारी साबित हुआ है। वर्मी कंपोस्ट से लाल चंदन के अंकुरण प्रक्रिया में बेहतर परिणाम आया है। साथ ही शत प्रतिशत बीजों से पौधे तैयार करने में सफलता मिली है। अब सफेद चंदन और लाल चंदन के बड़े-बड़े पैमाने पर प्लांटेशन करने की तैयारी है। लाल चंदन में सफेद चंदन की तरह कोई सुगंध नहीं होती है। लाल चंदन को हिंदू धर्म में काफी पवित्र माना जाता है और पूजा में इसका प्रयोग करते हैं।

चंदन सिर्फ दो प्रकार के होते हैं, लाल चंदन के एक पेड़ से ५-६ लाख की आमदनी होगी
वन विभाग के अनुसार चंदन सिर्फ दो प्रकार के होते हैं लाल और सफेद चंदन। लाल चंदन की लकड़ी को सबसे महंगी मानी जाती है। लाल चंदन का बाजार मूल्य करीब २५-३० हजार रुपए किलोग्राम बिकती है। वहीं एक लाल चंदन के पेड़ से करीब १५-२० किलो लकड़ी मिलने का अनुमान है। जिसे बाजार में बिक्री करने पर ५-६ लाख तक आमदनी होगी। चंदन से तेल निकालने बेंगलुरु में कारखाना स्थापित है। वहीं लकड़ी से बनी वस्तुओं की विशेष रूप से चीन, जापान में भारी मांग है, लेकिन चंदन की लकड़ी या प्रोडक्ट की सिर्फ सरकार ही एक्सपोर्ट कर सकती है। अंतराष्ट्रीय बाजार में एक टन लाल चंदन की लकड़ी की कीमत ३०-४० लाख तक होने का अनुमान है। लाल चंदन की लकड़ी का संगीत वाद्ययंत्र, फर्नीचर, मूर्तियां सहित अन्य उत्पाद बनाने में उपयोग करते हैं।

लाल चंदन के करीब ढाई हजार पौधे तैयार हैं। जिसे बहुत जल्द प्लांटेशन किया जाएगा। प्लांटेशन करने १० हेक्टेयर जमीन चिह्नित है। वहीं लाल चंदन के और बीज मंगाए गए हैं। एक-दो साल के भीतर २० हजार तक पौधे तैयार करने का लक्ष्य है।
अखिलेश मिश्रा, उप वनमंडलाधिकारी बैकुंठपुर

Published on:
21 Oct 2022 08:08 pm