कोटा

इस बांध की चादर चलते ही किसान नाचने लग गए, 36 गांवों के खेत होंगे सरसब्ज

कोटा जिले का अलनिया बांध सुबह लबालब हो गया। इससे इस बांध पर एक इंच पानी की चादर चलना शुरू हो गई। बांध पर चादर चलने से किसानों में खुशी की लहर है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए रबी सीजन में भरपूर पानी मिल सकेगा।

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Aug 29, 2024
अलनिया बांध सुबह लबालब हो गया। इससे इस बांध पर एक इंच पानी की चादर चलना शुरू हो गई।

कोटा जिले का अलनिया बांध बुधवार सुबह लबालब हो गया। इससे इस बांध पर एक इंच पानी की चादर चलना शुरू हो गई। बांध पर चादर चलने से किसानों में खुशी की लहर है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए रबी सीजन में भरपूर पानी मिल सकेगा।

7882 हैक्टेयर भूमि होंगी सिंचित

इस बांध से लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र के 27 और सांगोद विधानसभा क्षेत्र के 9 गांवों की भूमि सिंचित होती है। कुल सिंचित क्षेत्र 7882 हैक्टेयर है। इस क्षेत्र में सरसों, गेहूं, लहसुन, चना, धनिये आदि की बुवाई होती है। 80 किमी लम्बा नहरी तंत्र है। बांध का निर्माण 1961-62 में हुआ था। बांध 29 साल में केवल 13 बार ही पूरा भरा है।

बार बांध लबालब भरने से सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा

जल संसाधन विभाग के अधिशासी अभियंता भारतरत्न गौड़ ने बताया कि बांध की कुल जल भराव क्षमता 1544 मीलियन क्यूबिक फीट (एमसीएफटी) है, बांध बुधवार को फुल भर गया। सुबह से लगातार चादर चल रही है। पिछले साल कोटा जिले में औसत से कम बारिश होने से बांध केवल 25 फीसदी ही भरा था। इस कारण नहरों में नाममात्र का पानी छोड़ गया था। ज्यादातर किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाया था और गर्मी में बांध पूरी तरह रीत गया था। इससे क्षेत्र का भू जल स्तर भी काफी गिर गया था। इसके चलते यह क्षेत्र डार्क जोन में आ गया था। जल संकट के चलते पशुपालकों ने पलायन कर लिया था। इस बार बांध लबालब भरने से सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा।

रानपुर बांध का अतिरिक्त पानी डाला जाता है

यूआईटी की ओर से 2014-15 में रानपुर तालाब का जीणोZद्धार कर इस तालाब के अतिरिक्त पानी को अलनिया बांध में डालने के लिए डायवर्जन चैनल बनाया था। इस बार यह तालाब पिछले दिनों भर गया था। इसके बाद डायवर्जन चैनल के गेट खोलकर अलनिया बांध में पानी डाला गया था।

Published on:
29 Aug 2024 12:28 pm
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