VK Bansal biography: लैन्टर्न से लाइटहाउस तक कदम थमे लेकिन सफलता नहीं

जवानी के उस मोड़ पर जब जिंदगी सबसे हसीन होती है...कदम ही साथ छोड़ दें तो लोग जीने तक से इन्कार कर देते हैं, लेकिन इस बुंदेले ने कुदरत की बेरुखी को भी रोशनी बिखेरने का जरिया बना डाला।

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Aug 22, 2016
VK Bansal biography

जवानी के उस मोड़ पर जब जिंदगी सबसे हसीन होती है...कदम ही साथ छोड़ दें तो लोग जीने तक से इन्कार कर देते हैं, लेकिन इस बुंदेले ने कुदरत की बेरुखी को भी रोशनी बिखेरने का जरिया बना डाला। एक लालटेन, एक मेज और एक बच्चे के साथ चल पड़ा सफलताओं की नई इबारत लिखने।

कोटा कोचिंग की नींव ही नहीं रखी, बल्कि पहला आईआईटियंस और आईआईटी-जेईई का पहला टॉपर देकर सफलताओं का ऐसा चस्का लगाया जो ढ़ाई दशक बाद भी जारी है। ऐसे शख्स की जिंदगी के सफरनामे को उसके आईआईटियंस छात्र ने ही एक किताब की शक्ल दी और नाम रखा... वीके बंसल्स जर्नी, फ्रॉम लैन्टर्न टू लाइट हाउस।

सिटी मॉल में हर ओर तालियों की गडग़ड़ाहट गूंज रही थी। नामी कोचिंग संस्थानों के प्रबंध निदेशक और निदेशक एक ही जगह पर मौजूद थे। मौका था कोटा में कोचिंग की नींव रखने वाले बंसल क्लासेज के संस्थापक वीके बंसल की जीवनी के विमोचन का।

आईआईटियंस सचिन झा ने अपने शिक्षक के जिंदगी के हर पहलू को इस किताब में सहेजा है। झांसी में जन्म के बाद लखनऊ में पढ़ाई और फिर कोटा में नौकरी की शुरुआत। शादी के कुछ साल बाद ही पैरों का साथ छोड़ देना और उसके बाद शुरू हुए संघर्ष से कोटा कोचिंग का जन्म और सफलताओं के निर्बाध दौर की कहानी इस किताब में बखूबी है।

रेजोनेंस के प्रबंध निदेशक आरके वर्मा ने वीके बंसल से मिले पहले सबक को साझा किया। उन्होंने बताया कि 5 मई 1995 के दिन फैकल्टी के तौर पर बंसल क्लासेज ज्वाइन की थी। कुछ दिन बाद ही बंसल सर ने अचानक बुलाया और फिजिक्स की डेली प्रॉब्लम प्रेक्टिस से एक सवाल हल करने को कहा। मैने कर दिया, लगा बात बन गई, लेकिन तब बंसल सर ने कहा कि शिक्षक को ज्ञान हो यह पहली जरूरत है, लेकिन उससे छात्र भी इस ज्ञान से वाकिफ हों तभी शिक्षा की सार्थकता है।

इस फार्मूले का तोड़ नहीं......

उन्होंने कहा, कोचिंग संस्थानों में डीपीपी से लेकर डेढ़ घंटे की क्लास तक का फार्मूला बंसल सर ने बनाया और आज सभी इसे फॉलो कर रहे हैं। इसका तोड़ कोई नहीं तलाश सका। कैरियर पाइंट के निदेशक ओम माहेश्वरी ने बताया कि 1992 में जब उन्होंने कोचिंग की शुरुआत की तो पहला फोन बंसल सर का ही आया और पूछा कि क्या पढ़ाओगे, तब से लेकर आज तक उनका मार्ग दर्शन मिल रहा है।

मोशन के प्रबंध निदेशक नितिन विजय ने कहा कि बंसल क्लासेज आईआईटियंस ही नहीं उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षक भी तैयार करता है। मैं वहीं पढ़ा और यहीं से पढ़ाना सीखा। किताब के लेखक सचिन झा ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि जब जिंदगी में सबसे ज्यादा अंधेरा दिखे तो इस किताब को पढऩा। यह बताएगी कि सब कुछ खो चुके आदमी का साहस सफलताओं की नई कहानी कैसे लिखता है। इस अवसर पर वीके बंसल की पत्नी नीलम बंसल, समीर बंसल, नीलेश गुप्ता, एके तिवारी और गौरव यादव आदि लोग मौजूद थे।

Published on:
22 Aug 2016 03:52 pm