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एआई से ठगी का हब बना अमेरिका, पिछले साल 7,740 करोड़ रुपए से ज्यादा की लगी चपत

AI cybercrime: एआई आधारित साइबर ठगी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। एफबीआई की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में अमेरिका को एआई स्कैम से भारी आर्थिक नुकसान हुआ और हजारों शिकायतें दर्ज की गईं।

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Photo- freepik

Cyber fraud USA: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब साइबर अपराधियों के लिए एक बड़ा हथियार बनता जा रहा है। इसकी मदद से होने वाली धोखाधड़ी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में एआइ द्वारा की गई धोखाधड़ी से अमेरिका को लगभग 900 मिलियन डॉलर (लगभग 7,740 करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ। साथ ही, एफबीआई को एआई स्कैम से जुड़ी 31 हजार से अधिक शिकायतें भी मिलीं। यह संख्या 2024 की तुलना में 74 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार, एआई तकनीक लगातार बेहतर हो रही है और अपराधी भी इसका तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी वजह से डर है कि आने वाले समय में ऐसे स्कैम और बढ़ सकते हैं।

बेटी की आवाज कॉपी कर मां से ठगे 5,000 डॉलर

कैलिफोर्निया में एक महिला से 5,000 डॉलर से अधिक की ठगी की गई। स्कैमर ने एआई की मदद से उसकी बेटी की आवाज की हूबहू नकल तैयार की और विश्वास दिलाया कि उसकी बेटी मुसीबत में है। इसी तरह ओहियो की एक महिला ने 15 लाख डॉलर गंवा दिए, जब नकली एफबीआई एजेंटों ने उसे अपने बैंक खातों से पैसे निकालने के लिए मना लिया।

डीपफेक और रोमांस स्कैम प्रमुख हथियार

एफबीआई के साइबर अधिकारी माइकल माचटिंगर ने बताया कि एआई से तैयार किए गए फर्जी संदेश इतने असली और आधिकारिक लग सकते हैं कि सतर्क लोग भी आसानी से धोखा खा सकते हैं। उपभोक्ता सुरक्षा एजेंसियों ने आम नागरिक को सतर्कता बरतने की सलाह दी है। उनके अनुसार, स्कैमर्स डीपफेक तकनीक और रोमांस स्कैम का प्रमुखता से उपयोग करके लोगों को ठग रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा शिकार युवा बनते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे साइबर अपराधों से बचने के लिए लोगों को अनजान कॉल, वीडियो और मैसेज पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी भी वित्तीय लेन-देन से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान अलग माध्यम से सत्यापित करनी चाहिए। सरकार और साइबर एजेंसियां लगातार जागरूकता अभियान चला रही हैं। डिजिटल सुरक्षा उपकरणों और दो-स्तरीय प्रमाणीकरण का उपयोग भी जरूरी है। इसके साथ संदिग्ध लिंक और ऐप्स से बचना चाहिए ताकि एआई आधारित धोखाधड़ी से सुरक्षित रहा जा सके।