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अहमदाबाद सीरियल बम धमाके: जांच का नेतृत्व करने वाले तत्कालीन जेसीपी आशीष भाटिया बोले – ‘फिर नहीं हुए वैसे धमाके’

Ahmedabad Serial Bomb Blasts: अहमदाबाद सीरियल बम धमाके की जांच का नेतृत्व करने वाले तत्कालीन जेसीपी आशीष भाटिया ने बताया कि कैसे इंडियन मुजाहिद्दीन नेटवर्क का पर्दाफाश किया गया जिसके बाद उस तरह के धमाके फिर नहीं हुए।
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Ahmedabad Serial Bomb Blasts

अहमदाबाद सीरियल बम धमाके (File Photo)

26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में हुए सिलसिलेवार बम धमाके (Ahmedabad Serial Bomb Blasts) देश की सबसे बड़ी आतंकी घटनाओं में से एक थे। इस मामले की जांच का नेतृत्व करने वाले तत्कालीन अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के संयुक्त पुलिस आयुक्त और पूर्व डीजीपी आशीष भाटिया (Ashish Bhatia) का कहना है कि देशभर में सीरियल ब्लास्ट कर दहशत फैलाने वाले पूरे इंडियन मुजाहिद्दीन नेटवर्क का अहमदाबाद पुलिस ने पर्दाफाश किया। इन आतंकियों की कमर तोड़ दी गई थी, जिसके बाद देश में कहीं भी इस तरह के सिलसिलेवार बम धमाके नहीं हुए। उन्होंने इसे जांच एजेंसियों की बड़ी उपलब्धि बताया।

पूरे नेटवर्क को किया ध्वस्त

भाटिया ने बताया कि 26 जुलाई 2008 की रात हुए धमाकों के बाद अहमदाबाद शहर पुलिस ने जांच शुरू की और खुलासा किया कि इसके पीछे इंडियन मुजाहिद्दीन का हाथ था। सिर्फ 15 दिनों के भीतर स्थानीय स्तर पर शामिल आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में सामने आया कि प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) से जुड़ा अहमदाबाद का जाहिद शेख केरल के वाघामौन जंगलों में आतंकियों के प्रशिक्षण शिविर में शामिल होकर लौटा था। इसी सुराग से पुलिस स्थानीय मॉड्यूल तक पहुंची। इसके बाद फोन रिकॉर्ड की जांच, भरुच से संदिग्धों को हिरासत में लेने और दिल्ली के बाटला हाउस में हुई कार्रवाई से मिले इनपुट के आधार पर दिल्ली से आए अन्य आतंकियों की भूमिका भी सामने आई। महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों की पुलिस ने भी इस नेटवर्क को ध्वस्त करने में अहम भूमिका निभाई।

ए-टू-ज़ेड लिंक और पुख्ता सबूतों से मज़बूत हुआ केस

भाटिया ने कहा कि यह पहला ऐसा बड़ा मामला है, जिसमें निचली अदालत के पूरे फैसले पर गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने भी मुहर लगाई है। इसकी जांच और आरोप-पत्र इतने मजबूत हैं कि उस मामले से जुड़े ए टू ज़इड लिंक (किसने, कब, कहाँ साजिश रची, कैसे बम बनाए, कहाँ से सामान खरीदा, किसने उन्हें रखा, कैसे रखा) को बड़ी ही पुख्ता तरीके से सबूतों के साथ अदालत के सामने रखा गया। यही वजह है कि हाईकोर्ट ने भी 38 दोषियों की फांसी और 11 की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) भी इस फैसले को कायम रखेगा।