
इलाहाबाद हाईकोर्ट (File Photo)
उत्तर प्रदेश में आरोपियों से जुड़े बुलडोज़र एक्शन (Bulldozer Action) को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की दो सदस्यीय बेंच में मतभेद सामने आने के बाद मामला अब चीफ जस्टिस के पास पहुंच गया है। हमीरपुर के फैमुद्दीन और अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन किसी साझा निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे। अब चीफ जस्टिस तय करेंगे कि मामला तीसरे जज या नई बेंच को भेजा जाए।
याचिका में कहा गया कि मुख्य आरोपी आफान खान का संबंधित संपत्तियों से कोई मालिकाना संबंध नहीं है और बिना नोटिस उसके घर, इंडियन लॉज और आरा मिल के खिलाफ कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के बुलडोज़र फैसले का उल्लंघन है। राज्य सरकार ने जवाब दिया कि इंडियन लॉज सिंचाई विभाग की जमीन पर अवैध निर्माण है, जिसे हटाने का आदेश 2021 में ही दिया जा चुका था, जबकि आरा मिल के खिलाफ वन विभाग की अलग कार्रवाई चल रही है। सरकार ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने कई तथ्य छिपाए हैं।
जस्टिस अतुल श्रीधरन ने अपने 51 पृष्ठों के फैसले की शुरुआत बशीर बद्र के मशहूर शेर “लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में…” से की। उन्होंने कहा कि घर किसी व्यक्ति की जीवनभर की कमाई, मेहनत और पूरे परिवार की सुरक्षा का आधार होता है। सिर्फ एफआईआर के आधार पर मकान गिराना प्रतिशोधात्मक कार्रवाई है। उन्होंने एफआईआर दर्ज होने के बाद दो वर्ष तक ध्वस्तीकरण पर रोक और तीन वर्ष से ज़्यादा पुराने अवैध निर्माण पर कार्रवाई से पहले एक वर्ष का 'नोटिस ऑफ इंटेंट' देने का सुझाव दिया। साथ ही फैमुद्दीन और अन्य के खिलाफ चल रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई को प्रतिशोधात्मक मानते हुए रद्द कर दिया।
दूसरे जज ने जताई असहमति, भ्रष्टाचार पर भी कड़ी टिप्पणी
जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने कहा कि कानून में एक वर्ष पहले नोटिस देने का प्रावधान नहीं है और हाईकोर्ट को नई समय-सीमा तय नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 में पर्याप्त प्रक्रिया मौजूद है तथा अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक आत्म-संयम जरूरी है। वहीं जस्टिस श्रीधरन ने ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल 2025 रिपोर्ट, राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद और प्रशासनिक भ्रष्टाचार का उल्लेख करते हुए कहा कि रिश्वत लेकर अवैध निर्माण होने दिए जाते हैं और बाद में कार्रवाई होती है। उन्होंने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में दोषी अधिकारियों के लिए मृत्युदंड के प्रावधान पर विचार करने का भी सुझाव दिया। साथ ही कहा कि आरोपी के दूर के रिश्तेदारों के वैध घरों को निशाना बनाना न्यायसंगत नहीं है।
Updated on:
22 Jul 2026 02:40 am
Published on:
22 Jul 2026 02:39 am
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