
मद्रास हाईकोर्ट (File Photo)
मद्रास हाईकोर्ट (Madras High High Court) ने विदेशों से भारत में कचरा आयात करने के मामलों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि जानबूझकर देश में विदेशी कचरा मंगाना सिर्फ पर्यावरण कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता को सीधी चुनौती है। हाईकोर्ट ने कहा, "भारत माता पर कचरा फेंकने से बड़ा देशद्रोह और क्या हो सकता है?" जस्टिस डी. भरत चक्रवर्ती ने यह टिप्पणी विदेशी कचरे के अवैध आयात से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की।
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी देश की भूमि, पर्यावरण, जैव विविधता और नागरिकों का स्वास्थ्य उसकी संप्रभुता का अभिन्न हिस्सा हैं। इसलिए अगर कोई व्यक्ति या संस्था जानबूझकर दूसरे देशों का कचरा भारत में डंप कराती है, तो वह सिर्फ पर्यावरण को नहीं बल्कि राष्ट्र की गरिमा और सुरक्षा को भी नुकसान पहुंचाती है।
विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों में कचरा भेजने की प्रवृत्ति को अदालत ने 'वेस्ट कॉलोनियलिज़्म' बताते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यह अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरणीय दायित्वों और पर्यावरणीय न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी कीमत पर दुनिया का कूड़ाघर नहीं बन सकता और आर्थिक लाभ के नाम पर पर्यावरण तथा नागरिकों के स्वास्थ्य से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मामला एम/एस श्रीपति पेपर एंड बोर्ड्स प्राइवेट लिमिटेड और एम/एस राजराजेश्वरी क्राफ्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की याचिकाओं से जुड़ा है। कंपनियों ने कनाडा समेत अन्य देशों से 'वेस्ट पेपर' के नाम पर कार्गो आयात किया था। जांच में राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) और तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) ने पाया कि कंटेनरों में कागज के स्क्रैप के बजाय नगरपालिका का ठोस कचरा भरा था। इसमें इस्तेमाल की गई प्लास्टिक बोतलें, सड़क की सफाई से निकला कचरा, खाद्य अपशिष्ट, टूटे कांच, प्लास्टिक पैकेजिंग, पेपर कंटेनर और इस्तेमाल किए गए सॉफ्ट ड्रिंक के कैन शामिल थे। इसी मामले पर मद्रास हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है।
हाईकोर्ट ने दोनों कंपनियों को 60 दिन के भीतर पूरा कचरा उसी देश में वापस भेजने का निर्देश दिया, जहाँ से उसे आयात किया गया था। कोर्ट ने इसे दुबई भेजने या भारत में ही रीसाइक्लिंग या अन्य माध्यम से निस्तारण की मांग ठुकरा दी। साथ ही कहा कि अगर तय समय में कचरा वापस नहीं भेजा गया तो दोनों कंपनी पर 50-50 हज़ार रुपये प्रतिदिन पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाई जाएगी। कोर्ट ने कंटेनर डिटेंशन, डेमरेज और अन्य खर्च भी कंपनियों को वहन करने के निर्देश दिए।
Updated on:
09 Jul 2026 03:42 am
Published on:
09 Jul 2026 03:42 am
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