शहर के घटोत्कच चौराहा से महावीर नगर तृतीय तक करीब एक किमी गणेश शंकर विद्यार्थी हरीतिमा पट्टी पर झोपडिय़ा खड़ी हो गई। नगर विकास न्यास अधिकारियों की उदासीनता के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो रही। इस कारण हरीतिमा पट्टी पर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है।
कोटा. शहर के घटोत्कच चौराहा से महावीर नगर तृतीय तक करीब एक किमी गणेश शंकर विद्यार्थी हरीतिमा पट्टी पर झोपडिय़ा खड़ी हो गई। नगर विकास न्यास अधिकारियों की उदासीनता के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो रही। इस कारण हरीतिमा पट्टी पर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है।
दरअसल, नगर विकास न्यास के तत्कालीन चेयरमैन हरिकृष्ण जोशी ने इस हरीतिमा पट्टी का नामाकरण गणेश शंकर विद्यार्थी के नाम से किया था। हरीतिमा पट्टी इसलिए बनाई गई थी कि कॉलोनी हरी-भरी रहे। आसपास के लोगों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिले और घूमने-फिरने का अच्छा स्थान मिले। यहां पेड़-पौधे लगाए गए थे। न्यास अधिकारियों की उदासीनता व प्रभारी मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण हरीतिमा पट्टी अतिक्रमण की भेंट चढ़ती जा रही है। पूरी हरीतिमा पट्टी पर जगह-जगह झोपडिय़ां खड़ी हो गई हैं।
पशुओं का बना बाड़ा
इस हरीतिमा पट्टी पर बीच-बीच में पशुओं के बाड़े बन गए हैं। इनमें दिनभर गाय, भैंसे व अन्य पशु बंधे रहते हैं। कई पशु तो सड़कों पर ही खड़े रहते हैं। इससे वाहन चालकों को खासी परेशानी होती है। इस हरीतिमा पर कब्जा जमाए लोग आए दिन यहां उगे हरे-भरे पड़ों पर कुल्हाड़ी चलाकर काट रहे हंै। इससे कई जगहों पर पड़ों के ठूंठ ही नजर आते हैं।
चारदीवारी भी टूटी
हरीतिमा पट्टी की चारदीवारी भी टूटी पड़ी है। इससे पशु व अन्य लोग आसानी से इसके अंदर प्रवेश कर जाते हैं। चारदीवारी टूटी होने के कारण एक जगह तो लोगों ने कचरा डालना शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि न्यास की ओर से बीते पांच साल से चारदीवारी की मरम्मत का कार्य नहीं हुआ है।
हरीतिमा पट्टी पर दो-तीन बार पहले भी अतिक्रमण हटा चुके हैं, लेकिन कुछ लोग फिर से आ जमते हंै। इस हरीतिमा पट्टी पर फिर से अतिक्रमण हटवाएंगे। ये लोग यदि पेड़ काट रहे हैं तो गलत है। समय-समय पर चारदीवारी की मरम्मत करवाते हैं।
सी.पी. शुक्ला, एसक्सईन, यूआईटी