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कोटा के सरकारी अस्पताल में 2 प्रसूताओं की मौत के बाद बड़ा एक्शन, लेडी डॉक्टर बर्खास्त; सर्जन समेत 3 निलंबित

Kota Govt Hospital Maternal Death Case: कोटा मेडिकल कॉलेज में सीजेरियन डिलीवरी के बाद दो प्रसूताओं की मौत और अन्य की तबीयत बिगड़ने के मामले में प्राथमिक रूप से डॉक्टर्स की लापरवाही सामने आई है।

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कोटा

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Anil Prajapat

May 09, 2026

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कोटा मेडिकल कॉलेज में भर्ती महिलाएं। पत्रिका फाइल फोटो

कोटा/जयपुर। कोटा मेडिकल कॉलेज में सीजेरियन डिलीवरी के बाद दो प्रसूताओं की मौत और अन्य की तबीयत बिगड़ने के मामले में प्राथमिक रूप से डॉक्टर्स की लापरवाही सामने आई है। शुक्रवार को चिकित्सा आयुक्त बीएल गोयल के दौरे के बाद देर रात अर्जेंट टेंपरेरी बेसिस (यूटीबी) पर कार्यरत डॉ. श्रद्धा उपाध्याय को सेवा से हटा दिया गया। जबकि एक चिकित्सक समेत दो नर्सिंग कर्मियों को निलंबित किया गया है। वार्ड प्रभारी प्रोफेसर डॉ. बीएल पाटीदार व डॉ. नेहा सिहरा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पोस्ट गायनिक वार्ड के सीनियर डॉक्टर गायब थे और रेजिडेंट के भरोसे उपचार चल रहा है। जांच में प्रथम दृष्ट्या दोषी पाए जाने पर चिकित्सा निदेशालय ने सर्जरी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. नवनीत कुमार, सीनियर नर्सिंग ऑफिसर गुरजीत कौर और निमेश वर्मा निलंबित कर दिया है।

वहीं, यूटीवी पर कार्यरत सहायक आचार्य डॉ श्रद्धा उपाध्याय को सेवा से हटा दिया गया है। आयुक्त ने संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल तथा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. निलेश जैन के साथ करीब तीन घंटे तक नए अस्पताल में जांच की। डिलीवरी के बाद प्रसूताओं को कौन-कौनसी दवाइयां दी गई। उस दौरान किस डॉक्टर की ड्यूटी थी और ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों की जानकारी ली। उन्होंने भर्ती प्रसूताओं से बात की।

सूत्रों ने बताया कि प्रसूताओं के उपचार के दौरान एक सीनियर चिकित्सक गायब थे। इसके चलते ऑपरेशन की जिम्मेदारी सीनियर रेजिडेंट को दी गई थी। नए अस्पताल में 4 मई को विज्ञान नगर निवासी सपना की सीजेरियन डिलीवरी के बाद नवजात बच्ची की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि जन्म के दो घंटे तक बच्ची पूरी तरह स्वस्थ थी, लेकिन एनआइसीयू में टीका लगाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई।

कांग्रेस ने बनाई जांच कमेटी

इस मामले में राजस्थान कांग्रेस ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि समिति पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर तीन दिन में रिपोर्ट सौंपेगी।

श्रेष्ठ टीम से इलाज

मामला बेहद गंभीर है। मरीजों को एयरलिफ्ट कर जयपुर लाने की योजना थी, लेकिन परिजन नहीं माने। जयपुर से श्रेष्ठ टीम भेजी गई हैं, जो वहां उपचार कर रही है। सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-गजेन्द्र सिंह खींवसर, चिकित्सा मंत्री