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Kota Hospital Case: नवजात को ठीक से देख भी नहीं पाई मां, तीसरे दिन प्रसूता की मौत; नमूने पुणे भेजे, दवा सप्लाई सीज

Rajasthan News: कोटा के अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद लगातार बिगड़ती प्रसूताओं की हालत ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर एक ही वार्ड में महिलाओं की तबीयत अचानक क्यों बिगड़ी—दवा, फ्लूड या सिस्टम में कहीं बड़ी चूक हुई?

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कोटा

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Akshita Deora

May 08, 2026

Kota Medical College

रोती हुई मासूम और नवजात की फोटो: पत्रिका

Medical College Kota: कोटा के मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद गुरुवार सुबह एक और प्रसूता की मौत हो गई। अनंतपुरा निवासी 20 वर्षीय ज्योति ने तीन दिन पहले बेटे को जन्म दिया था, लेकिन वह अपने नवजात को ठीक से देख भी नहीं पाई।

पति रवि नायक ने बताया कि ज्योति को 4 मई को भर्ती कराया गया था। सिजेरियन डिलीवरी के बाद उसे वार्ड में शिफ्ट किया गया। रवि का आरोप है कि अगले दिन सुबह ब्लड प्रेशर गिरने और सांस लेने में तकलीफ होने लगी। इसके बाद इमरजेंसी में ले जाकर गलत दवा देने से हालत और बिगड़ गई। परिजन ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शव लेने से इनकार कर दिया। समझाइश के बाद शाम को चार सदस्यीय मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया।

अस्पताल के गायनिक वार्ड में 4 मई को गायनिक वार्ड में सिजेरियन के बाद छह महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई थी। इनका बीपी लो होना, प्लेटलेट्स कम और यूरिन पास होना बंद हो गया था। जिससे किडनी पर असर पड़ा। इनमें से एक प्रसूता रावतभाटा निवासी पायल (28) की भी सिजेरियन डिलीवरी के बाद 5 मई मौत हो गई थी। अन्य प्रसूताओं को जयपुर रेफर करने की तैयारी की जा रही है।

मां रेफर की बात सुन फफक पड़ी मासूम त्रिशा

अस्पताल में भर्ती इटावा निवासी प्रसूता रागिनी की हालत गंभीर है। चिकित्सकों ने उसे जयपुर रेफर करने को कहा तो बेटी त्रिशा और पति लोकेश का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

जांच के लिए पुणे भेजे नमूने

सीएमएचओ डॉ. नरेंद्र नागर ने बताया कि मरीजों को दिए गए फ्लूड, एंटीबायोटिक और इंजेक्शन के संबंधित बैच की प्रदेश में सप्लाई रोक दी गई है। राजस्थान मेडिकल सर्विस कमीशन लिमिटेड (आरएमएससीएल) के जरिए यह सप्लाई हुई थी। इस बैच की पूरी सप्लाई को सीज करवाया गया है। दवाओं के नमूने जांच के लिए पुणे भेजे जा रहे हैं।

15 दवाओं के सैंपल लिए

जयपुर से आई चार सदस्यीय विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम प्रसूताओं के उपचार और दवाओं की जांच कर रही है। औषधि नियंत्रक विभाग ने पोस्ट गायनिक वार्ड से 15 दवाओं के सैंपल लिए हैं।

कारण अब तक स्पष्ट नहीं : प्राचार्य

आइसीयू में भर्ती चार में से दो प्रसूताओें की हालत में सुधार है, जबकि दो की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में अब तक कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है।
-डॉ. नीलेश जैन, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज कोटा