
कोटा. फटे कपड़े... टूटे धड़ और खोखले जिस्म के बावजूद दसकंधर रावण दशहरा मैदान में ऐसा अड़ा कि निगम अफसरों और आतिशगरों की लाख कोशिशों के बाद भी उसका एक भी सिर नहीं जल सका। आखिर में आतिशगरों ने पुतले की रस्सियां खींच उसे नीचे गिरा कर रावण वध की रश्म अदायगी की।
सवा सौ साल के इतिहास में पहली बार रावण के न जलने पर मेला अधिकारी आग और पानी को जिम्मेदार ठहराते रहे। वहीं महापौर और मेला आयोजन समिति ने इस अराजकता के लिए अफसरों को आड़े हाथों लिया। फिलहाल पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए पार्षदों की तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है।
बुराई का प्रतीक रावण धू-धू कर जला, अपलक निहारते डेढ़ लाख लोग, रावण के पुतले का दहन 17 मिनट में हुआ
कोटा की शान 126 वें राष्ट्रीय दशहरा मेले में मंगलवार को विजयादशी के पर्व पर दशहरा मैदान के विजयश्री रंगमंच पर परम्परा और रीति रिवाज के अनुसार पूजन कर 101 फीट के रावण के पुतले का दहन किया गया है, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों और मेला समिति के बीच चल रही खींचतान से कोटा से सबसे बड़े आयोजन रावण दहन के कार्यक्रम पर दाग लगा दिया है।
रावण के पुतले के सिर अधजले रह गए। रावण दहन कार्यक्रम में डेढ़ लाख से अधिक लोग साक्षी बने। हर बार रावण दहन मुश्किल से पांच- सात मिनट लगते थे, लेकिन इस बार 17 मिनट में भी रावण का पुतला पूरी तरह जल नहीं पाया है। रावण के पुतले का ऊपर का हिस्सा श्रीराम रंगमंच की ओर गिर गया।
इससे पहले गढ़पैलेस से शाम करीब 6 बजे भगवान लक्ष्मी नारायण की सवारी राजसी वैभव और गाजे-बाजे के साथ रवाना हुई। दशहरा मैदान में पहुंचने पर पूर्व राज परिवार के सदस्य इज्यराजसिंह ने विधि-विधान के अनुसार पूजन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला थे।
बिरला ने विजयादशमी पर्व की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारा देश विभिन्न संस्कृति और परम्पराओं है। यहां हर त्योहार धूमधाम और उल्लास से मनाया जाता है। यह पर्व असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाया जाता है। बुराइयों का त्याग करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। इस मौके पर विधायक संदीप शर्मा, कल्पना देवी, महापौर महेश विजय, मेला समिति अध्यक्ष राममोहन मित्रा व निगम अधिकारी मौजूद थे।
रावण का पुतला 101 फीट
दहन : रात 8.10 बजे से 8..27 तक हुआ।
मेघनाथ का पुतला : 55 फीट
दहन : 8.06 बजे से 8.15 बजे तक
कुम्भकरण का पुतला : 55 फीट
दहन : 8.01 बजे से 8.05 बजे तक
1625
सूतली बम लगाए पुतलों में
6.72
लाख रुपए की कुल लागत आई रावण परिवार के पुतले तैयार करने में