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कोटा: हार्ट फेल्योर के बाद भी मां ने हारी नहीं हिम्मत, 29 हफ्ते में 1.5 किलो के बच्चे को दिया जन्म, दोनों सुरक्षित

कोटा मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने हार्ट फेल्योर से जूझ रही 31 वर्षीय गर्भवती महिला और 29 सप्ताह के नवजात को सुरक्षित बचाकर नया जीवन दिया। 21 दिन के सफल इलाज के बाद जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
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Aug 25, 2026
kota medical college news
नए अस्पताल में मरीज के साथ चिकित्सक टीम (Photo-Patrika)

कोटा। गंभीर हृदय रोग से जूझ रही 31 वर्षीय गर्भवती महिला और 29 सप्ताह में जन्मे उसके नवजात बच्चे को मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में तीन विभागों के डॉक्टरों की टीम ने इलाज कर बचा लिया। प्रसव के बाद महिला की हालत बिगड़ गई और वह हार्ट फेल्योर की स्थिति में चली गई। वहीं, 1.5 किलो वजन वाले प्रीमेच्योर बच्चे को आईसीयू में भर्ती रखना पड़ा।

21 दिन तक चले इलाज के बाद मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हुए, जिसके बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. पंकज जैन ने बताया कि बारां जिले के छबड़ा क्षेत्र के दीलोद निवासी ममता को 4 अगस्त को सांस लेने में परेशानी, शरीर में सूजन और घबराहट की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

जांच में महिला के दिल में लार्ज एएसडी (एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट) और पल्मोनरी हाइपरटेंशन की समस्या सामने आई। इसके बाद 7 अगस्त को 29 सप्ताह की गर्भावस्था में प्रसव हुआ। बच्चे का वजन सिर्फ 1.5 किलो था, इसलिए उसे आईसीयू में रखा गया और महिला की भी लगातार निगरानी करते हुए इलाज किया गया।

प्रसव के बाद बिगड़ी हालत

प्रसव के बाद महिला को सांस लेने में ज्यादा परेशानी होने लगी और उसकी हालत बिगड़कर हार्ट फेल्योर तक पहुंच गई। उसका ब्लड प्रेशर 80/60 एमएमएचजी और हृदय गति 134 प्रति मिनट थी। ऑक्सीजन सेचुरेशन कम होने के साथ शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर 99 तक पहुंच गया। डॉक्टरों ने जीवनरक्षक दवाएं देने के साथ एनआईवी के जरिए ऑक्सीजन सपोर्ट दिया। संक्रमण को देखते हुए एंटीबायोटिक दवाओं से भी इलाज किया गया।

21 दिन बाद जच्चा-बच्चा को मिली छुट्टी

जन्म के बाद 1.5 किलोग्राम वजन वाले नवजात को शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहित अजमेरा की देखरेख में आईसीयू में भर्ती किया गया। लगातार निगरानी और उपचार से उसकी स्थिति में सुधार हुआ। स्त्री रोग विभाग की यूनिट हेड डॉ. नेहा सिहरा के नेतृत्व में प्रसूता की देखभाल की गई। 21 दिन बाद जच्चा-बच्चा दोनों को स्वस्थ होने पर छुट्टी दे दी गई। प्राचार्य डॉ. निलेश कुमार जैन ने बताया कि चिकित्सकों के आपसी समन्वय से मरीज को नया जीवन मिला।

Updated on:
25 Aug 2026 10:18 am
Published on:
25 Aug 2026 10:18 am