महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ ने एनालॉग पनीर और दूसरे गैर-डेयरी उत्पादों को लेकर सख्ती दिखाई है। राजस्थान में अभी ऐसी अलग रोक नहीं है जबकि राजस्थान देश के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक राज्यों में है। यानी जिस प्रदेश की पहचान दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता से होनी चाहिए, वहीं उपभोक्ता को यह भरोसा भी नहीं है कि जिस पनीर को वह पनीर समझकर खरीद रहा है, वह वास्तव में दूध से बना है या किसी सस्ते विकल्प से? दूध को हम संपूर्ण आहार मानते हैं। इसलिए जब बाजार में पनीर, मावा और क्रीम की शक्ल में ऐसे उत्पाद उतरने लगें, जिनमें वनस्पति वसा या दूसरे गैर-दुग्ध पदार्थ इस्तेमाल किए गए हों, तो सवाल उपभोक्ता के अधिकार और स्वास्थ्य के भरोसे का बन जाता है।