
कोटा . ट्रेंचिंग ग्राउंड के चलते नान्ता से लेकर कुन्हाड़ी तक का इलाका गैस चेंबर में तब्दील हो चुका है। हवा में घुल कर सांसों में दाखिल हो रहे कूड़े के जहरीले कण फेफड़ों का दम घोंट रहे हैं। जबकि क्लोराइड, केल्सियम, टीडीएस और हद पार कर चुकी पानी की लवणता लोगों के दिल और गुर्दों को खराब कर देगी। 16 साल से इंसानी जिंदगियों से खेल रहे आला अफसर अब बॉयोलॉजिकल पार्क में वन्य जीवों को बसाकर उन्हें भी बेमौत मारने की तैयारी में जुटे हैं।
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खराब हो जाएगी श्वांंस नली
श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. केवल कृष्ण डंग को जब सीपीसीबी की रिपोर्ट बताई गई तो वह चौंक पड़े। उन्होंने कहा कि यदि हवा इतनी ज्यादा दूषित हो चुकी है तो प्रदूषण की चपेट में आकर आसपास के इलाके में रहने वाले लोगों की सांस नलियां बुरी तरह से खराब हो सकती हैं। इतना ही नहीं, कचरे के संक्रमित बारीक कण श्वांस नली से होते हुए खून में भी मिल सकते हैं। इससे दिल और किडऩी भी खराब हो सकते हैं। दमा रोग होना और फेफड़े खराब होना तो होना तय है।
किडनी डैमेज हो जाएगी
न्यू मेडिकल कॉलेज के नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. विकास खंडोलिया कहते हैं कि इन हालात में स्टोन की समस्या तो आम है, किडनी के फिल्टर (नेफ्रोन) भी खराब हो सकते हैं। इससे पूरे शरीर में इन्फेक्शन फैलने का खतरा बढ़ जाता है। खून की कमी के साथ-साथ दिमाग को इस कदर नुकसान पहुंच सकता है कि याददाश्त तक जा सकती है।
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वन्यजीवों के साथ न हो खिलवाड़
कोटा विवि के वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट की कॉर्डिनेटर डॉ. सुरभि श्रीवास्तव ने ट्रेंचिंग ग्राउंड के पास बॉयोलॉजिकल पार्क बनाए जाने पर खासी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब ट्रेंचिंग ग्राउंड के हालात इतने खराब हैं तो यहां वन्य जीवों को लाना उनकी जिंदगी से खिलवाड़ करना होगा। खतरनाक बीमारियों की चपेट में आने से पहले ही दम घुटकर मर जाएंगे। इसलिए सरकार यहां 40 करोड़ रुपए बर्बाद करने के बजाय कहीं और साफ एवं सुरक्षित जगह तलाश कर बॉयोलॉजिकल पार्क विकसित करे।
हैवी मेटल्स की रिपोर्ट आना बाकी
आरएसपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी अमित शर्मा ने बताया कि बोर्ड ने ट्रेंचिंग ग्राउंड के आसपास के पानी में हैवी मेटल्स की मात्रा की भी जांच करवाई है। पानी के सेंपल लेने के बाद लैब में परीक्षण चल रहा है। उस रिपोर्ट के आने के बाद इस इलाके में जल प्रदूषण की भयावहता का और सटीक अंदाजा लगाया जा सकेगा।